अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे निजी बस संचालकों ने अब कार्रवाई के भय से अपनी बसों पर मुफ्त और रियायती सुविधाएं लिखवानी शुरू कर दी हैं। अमर उजाला में शुक्रवार को खबर प्रकाशित होने के बाद अधिकारी सख्त हुए तो निजी बस संचालकों ने आदेशों की पालना शुरू की। शुक्रवार को बहादुरगढ़ बस अड्डे में आई पांच बसों की पिछली खिड़की के पास 30 मुफ्त और 10 रियायती सुविधाएं लिखी दिखाई थी।
ये है मामला
दरअसल, परिवहन नीति-2016 के तहत जिन निजी एवं सहकारी समिति की बसों को परमिट दिए गए हैं, उनमें रोडवेज बसों के समान यात्रियों को सुविधाएं देने का नियम है। नियमों के हिसाब से 30 श्रेणी के यात्रियों को बसों में नि:शुल्क यात्रा व 10 श्रेणी के यात्रियों को रियायत देने का प्रावधान है। मगर निजी बस संचालक इन नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। इसलिए प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण ने निजी बस संचालकों को तमाम मुफ्त व रियायती सुविधाएं बसों पर लिखने के नोटिस जारी कर दिए। नोटिस मिलने के बावजूद निजी बस मालिक अपनी धुन में मग्न रहे।
अमर उजाला ने उठाया मुद्दा
निजी बस संचालकों द्वारा सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाने का यह मामला अमर उजाला ने उठाया। शुक्रवार को अमर उजाला (माई सिटी) में ‘आदेशों के बाद भी निजी बस संचालकों ने नहीं लिखवाईं मुफ्त और रियायती सुविधाएं’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। समाचार प्रकाशित होने के बाद यह मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया तो उन्होंने सख्ती बरती। उधर, कार्रवाई के भय से आनन-फानन मेें निजी बस संचालकों ने अपनी बसों पर निर्धारित साइज में तमाम 30 मुफ्त और 10 रियायत वाली सुविधाएं लिखवाई। शुक्रवार की बस अड्डे में आई झज्जर-बहादुरगढ़ रूट की पांच बसों के पीछे उक्त सुविधाएं लिखी हुई थी। ये सुविधाएं लिखे जाने के बाद अब यात्रियों को काफी मदद मिलेगी।
अधिकारी बोले
परिवहन नीति-2016 के नियमों को मानने के बाद ही निजी बसों को परमिट दिया गया था। इसलिए निजी बस संचालकों को रोडवेज बसों की तर्ज पर पात्रों को यह सुविधा देनी होगी। प्राधिकरण की लगातार बस अड्डे पर आकर बसों की चेकिंग करेगी। यदि किसी बस पर सुविधाएं नहीं लिखी जाती हैं तो चालान तो किया जाएगा ही। वहीं, बस का परमिट भी रद्द किया जा सकता है।
- जसवीर सिंह, ट्रांसपोर्ट सब इंस्पेक्टर, बहादुरगढ़।