अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
झज्जर-बहादुरगढ़ मार्ग पर गांव दुल्हेड़ा में हुए सड़क हादसे में राजकुमार की मौत के बाद मोरवाला (चरखीदादरी) निवासी रामेश्वर पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है। करीब 6 साल पहले सड़क हादसे में उसके बड़े बेटे की मौत हो गई थी। अब छोटे बेटे की भी मौत होने के बाद घर का चिराग बुझ गया है। अब रामेश्वर घर में अकेला रह गया है।
पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा था राजकुमार
राजकुमार पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा था। बचपन में उसकी मां चल बसी थी। किसी तरह पिता रामेश्वर ने परिवार को संभाला। तीनों बेटियों की शादी होने के बाद घर में केवल रामेश्वर व उसके दो बेटे रह गए। फिर रामेश्वर ने बड़े बेटे कृष्ण का विवाह भिवानी जिले के बाढड़ा में कर दिया। कृष्ण को एक लड़का व एक लड़की हुई।
छह साल पहले हुई कृष्ण की मौत
परिवार ठीक चल रहा था कि अचानक परिवार की खुशियों को ग्रहण लग गया। करीब 6 साल पहले कृष्ण की सड़क हादसे में मौत हो गई। रोडवेज बस ने उसकी बाइक को चपेट में ले लिया था। कृष्ण की मौत के बाद उसकी पत्नी अपने दोनों बच्चों सहित अपने मायके चली गई। इसके बाद घर में केवल रामेश्वर व राजकुमार ही रह गए।
छह महीने पहले शुरू की थी ड्राइवरी
परिवार चलाने के लिए करीब छह महीने पहले ही राजकुमार ने चरखीदादरी निवासी एक ट्रांस्पोर्टर के यहां नौकरी शुरू की। शनिवार को वह माल उतारने दिल्ली आया था और वापस लौटते वह रविवार की सुबह हादसे का शिकार हो गया। उसकी मौत के बाद अब घर में पिता रामेश्वर अकेला रह गया है।
किसकों राखी बांधेंगी बहनें
पहले बड़े और अब छोटे बेटे को खोने के बाद बुजुर्ग पिता रामेश्वर की आंखों से आंसू नहीं थम रहे। पोस्टमार्टम के दौरान अस्पताल में पहुंचे परिजनों का भी बुरा हाल था। इस हादसे से तीनों बहनों से राखी बांधने के लिए कलाई भी छिन गई है। कृष्ण के जाने के बाद तीनों हर रक्षाबंधन पर राजकुमार को राखी बांधने आती थी। अब राजकुमार भी नहीं रहा तो किसको राखी बांधेंगी।
हादसे के कारण स्पष्ट नहीं
सड़क हादसे के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। मृतक राजकुमार के ताऊ के लड़के संदीप ने कैंटर चालक को हादसे का दोषी ठहराया है जबकि चर्चा तो यह भी रही कि नीलगाय को बचाने के चक्कर में दोनों गाड़ियों के बीच यह टक्कर हुई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
दूसरे बेटे की मौत के बाद बुझ गया घर का चिराग, अकेेला रह गया पिता
-छह साल पहले सड़क हादसे में राजकुमार के बड़े भाई की भी हो गई थी मौत, बचपन में ही चल बसी थी मां