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रिश्तों में बढ़ती दूरी बहा रही अपनों का खून

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
वक्त बदलने के साथ-साथ रिश्तों में कमजोरियां भी बढ़ती जा रही हैं। रिश्तों में आई कमजोरी क ी वजह से अपने ही अपनों का खून बहा रहे हैं। बीते महीनेभर में क्षेत्र में तीन ऐसी वारदातें हो चुकी हैं, जिनमें अपनों ने ही अपने ही भाई, पिता और रिश्तेदार की हत्या कर दी।

वारदात नंबर 1 : मां के कहने पर दत्तक पुत्र ने की पिता की हत्या
आपसी विवाद के चलते गत 24 मई को लाइनपार के छोटूराम नगर निवासी रामलगन (50) को अपनों ही द्वारा मौत के घाट उतार दिय गया था। दरअसल, रामलगन और उसकी पत्नी कुंवल देवी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। एक दिन दोनों में झगड़ा होने के बाद पत्नी कुंवल देवी ने अपने दत्तक पुत्र राजन व उसके मित्र विकास से रामलगन को ठिकाने लगाने की बात कही। गत 24 मई को राजन और विकास ने रामलगन को उसके घर में ही गला दबाकर मौत के घाट उतारने का प्रयास किया। जैसे ही गला दबाने से रामलगन बेहोश हुआ तो दोनों उसे मृत समझ छोड़कर भाग गए थे। लेकिन दौराने उपचार दो दिन बाद रामलगन में पीजीआई रोहतक में दम तोड़ दिया। मृतक के बेटे मुकेश की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। फिलहाल तीनों हिरासत में हैं।
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वारदात नंबर 2 : बड़े भाई ने की छोटे भाई की हत्या
गांव दुल्हेड़ा में 15 जून की रात एक युवक ने अपने सगे छोटे भाई की तेजधार हथियार से निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी थी। रात को नशे की हालत में घर पर आए मनीष ने पहले तो अपने अभिभावकों के साथ झगड़ा किया। इसके बाद वह प्लॉट में चला गया। वहां जाकर मनीष ने चारपाई पर सो रहे अपने छोटे भाई अजय पर तेजधार हथियार से वार किए। जिससे अजय की मौत हो गई। परिजनों की शिकायत पर मनीष के खिलाफ सदर थाने में केस दर्ज हुआ है। आरोपी पुलिस पकड़ से बाहर है।

वारदात नंबर 3 : विवाद में चली गई जान
वीरवार 22 जून की सुबह सोलधा में हुए झगड़े में राजेश नाम के एक व्यक्ति की जान चली गई। जबकि राकेश और रामकुमार नाम के दो व्यक्ति पीजीआई रोहतक में भर्ती हैं। कुछ अन्य लोग भी इस झगड़े में घायल हुए। दोनों ही पक्ष एक ही कुनबे के हैं। इस झगड़े के कारण तो स्पष्ट नहीं हो पाए हैं, लेकिन एक व्यक्ति की जान जरूर चली गई। पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर लिया है।
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बुजुर्ग बोले
शहर निवासी करीब 75 वर्षीय नवल किशोर ने कहा कि पहले इलाके में इस तरह की घटनाएं नहीं होती थी। लोग दूसरों के झगड़ों में घुसकर बीच-बचाव किया करते थे। मगर अब तो अपने ही अपनों का खून बहा रहे हैं। एक-दूसरे से जलन व संस्कारों की कमी की वजह से ही ऐसी घटनाएं बढ़ने लगी हैं। 65 वर्षीय महेंद्र ने कहा कि यदि इस तरह रहा तो ये घटनाएं बढ़ती चली जाएंगी। इनसे बचने के लिए युवा पीढ़ी को अच्छे संस्कार देने होंगे। बड़ों को भी गुस्से पर नियंत्रण रखना चाहिए।
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