अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
प्रशासन के द्वारा चलाए गए स्ट्रे कैटल फ्री अभियान को कामयाब बताकर डीसी के द्वारा करीब छह माह पूर्व झज्जर शहर को स्ट्रे कैटल फ्री घोषित कर दिया गया था। दो माह चले इस अभियान के बाद अब आलम यह है कि शहर की सड़कों पर गोवंश के झुंड नजर आने लगे हैं। अमर उजाला के द्वारा शहर की मुख्य सड़कों का रविवार को निरीक्षण किया गया। इसमें पाया गया कि शहर के अधिकांश मुख्य स्थानों पर लावारिस गोवंश के झुंड घूम रहे हैं। सब्जी मंडी में तो आलम ये है कि सांडों की दिन भर खूब लड़ाई होती है।
500 सांडों को भेजा गया था गोशाला
नपा के द्वारा चलाए गए अभियान में 500 सांडों को गोशाला भेजा गया था। जिन्हें पशुपालन विभाग के द्वारा टैग लगाया गया था। ताकि सांड फिर से सड़कर पर नजर आएं तो उनकी पहचान की जा सके। अब काफी संख्या में टैग लगे सांड भी सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में नपा का अभियान फेल होता ही नजर आ रहा है।
दो लोगों की हो चुकी है मौत
सांड के द्वारा टक्कर मारे जाने की वजह से झज्जर व बहादुरगढ़ शहर में दो लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं सांडों को जब नगरपालिका कर्मचारियों के द्वारा पकड़ा जा रहा था तो एक नपा कर्मी को भी सांड ने हमला कर घायल कर दिया था। जिसके बाद नपा कर्मियों ने सांड पकड़ने से हाथ खड़े कर दिए थे। जिसके कुछ दिन बाद नपा कर्मियों को फिर से काम पर लगाया गया था।
गोशालाओं ने छोड़े सांड : सचिव
नपा के सचिव नरेंद्र सैनी का कहना है कि गोशाला संचालकों के द्वारा सांडों को छोड़ा गया है। जिसकी वजह से सांड फिर से दिखाई देने लगे हैं। टैग लगे सांड बाजार में नजर आ रहे हैं। इसके विकल्प के लिए प्रशासन अब शहर के साथ लगते गांवों की जमीन पर नंदीशाला और गोशालाओं का निर्माण करवाएगा। जहां पर इन लावारिस गोवंश को रखा जाएगा।
गोशालाओं में नहीं है जगह : कबलाना
गोशाला संघ के जिला प्रधान हवा सिंह कबलाना ने बताया कि शहर की गोशाला में 2500 गोवंश इस समय मौजूद हैं। जबकि उनकी क्षमता केवल दो हजार की है। अगर अब प्रशासन ने फिर से अभियान चलाकर गोशालाओं में सांड छोड़ना चाहा तो उनके पास एक इंच जगह भी नहीं है। वे प्रशासन की बात को इस बार नहीं मानेंगे। गोशालाओं में केवल गोवंश को रखा जाएगा।