अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
गांव मांडोठी में मृत मिले 35 साइबेरियन पक्षियों की मौत के कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम के बाद विसरा जांच के लिए मधुबन लैब में भेज दिया है। वहीं, इस घटना पर पक्षी प्रेमियों ने वन्य जीव विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठा दिए हैं। उनका कहना है कि ये पक्षी झीलों के अलावा आसपास गांवों के तालाबों व जलभराव वाले क्षेत्र भी ठहरते हैं। मगर वहां सुरक्षा के बंदोबस्त नहीं किए जा रहे, जिससे ये पक्षी शिकारियों का शिकार हो रहे हैं। विभाग आरोपियों को सख्त सजा दे और इन पक्षियों की सुरक्षा पर ध्यान दे।
ये है मामला
दरअसल, इन दिनों भिंडावास झील में कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी आए हुए हैं। बहुत से पक्षी गांव मांडोठी के पास स्थित एक जल वाले क्षेत्र (अस्थाई झील) में ठहरे हैं। गत बुधवार की शाम को वन्य जीव विभाग को सूचना मिली कि यहां कुछ लोगों द्वारा विदेशी पक्षियों का शिकार किया जा रहा है। जिस पर टीम मौके पर पहुंची तो काफी संख्या में मृत पक्षी पाए गए। अधिकारियों और ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद चार लोगों को 35 साइबेरियन पक्षियों के शवों सहित काबू कर लिया। इन पर पक्षियों की हत्या करने का आरोप है।
विसरा भेजा लैब
गांव मांडोठी स्थित पशु अस्पताल में वीरवार को उक्त 35 साइबेरियन पक्षियों का पोस्टमार्टम हुआ। डॉ. बिजेंद्र रोहिल्ला ने बताया कि जांच के लिए विसरा मधुबन स्थित लैब में भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असल कारणों की पुष्टि हो पाएगी। वाइल्ड लाइफ, फोरेस्ट विभाग व पुलिस की टीम मामले की जांच में जुटी है। इस संबंध में वाइल्ड लाइफ विभाग के इंस्पेक्टर जयभगवान शर्मा ने बताया कि हिरासत में लिए आरोपियों ने शिकार करने से इंकार किया है। फिलहाल उन्हें 52 हजार पांच सौ रुपये का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया है। अगर वे दोषी पाएं तो उनके खिलाफ जीव जंतु अधिनियम के तहत कार्यवाही की जाएगी।
पक्षी प्रेमियों में गुस्सा
वन्य जीव उपचार केंद्र के सदस्य विनोद कुमार ने कहा कि ये पक्षी हर वर्ष आते हैं। इसलिए विभाग को यह भी जरूर मालूम होगा कि ये आसपास किन-किन गांवों में ठहरते हैं। मगर विभाग इस ओर रुचि नहीं लेता और शिकारी इन मौकों का भरपूर लाभ उठा लेते हैं। मांडोठी का तो मामला सामने आ गया, न जाने कहां-कहां कितने पक्षियों को मारा जा रहा होगा। पुनीत ने कहा कि ये पक्षी आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं। इन्हीं की वजह से सुल्तानपुर और भिंडावास आदि पर्यटन स्थलों पर सर्दी होने के बावजूद लोगों की भीड़ बढ़ जाती है। इन विदेशी पक्षियों की सुरक्षा एवं व्यवस्था का जिम्मा हमारा है। इनकी सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी की शौकीन जोशी राठी ने कहा कि पक्षी यहां के हो या विदेशी, शिकार बढ़ रहे हैं। इस कारण पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं और कई विलुप्त होने की कगार पर है। वन्य विभाग को इनकी सुरक्षा पर सुनिश्चित करनी चाहिए।
प्रजनन के लिए आते हैं पक्षी
इन दिनों साइबेरिया में तापमान काफी नीचे चला जाता है और यही समय इन पक्षियों के प्रजनन का होता है। इसलिए हजारों किलोमीटर का सफर तय करके साइबेरियन पक्षी लालसर, पटियरा, कैमा, मऊरार, पोचर्ड रेडक्रेस्टेड, सुर्खाब, स्पाटेड ईगल, मार्स व हैरियन व साइबेरियन बत्तख के अलावा कई अन्य नस्ल के पक्षी हर साल नवंबर में भारत आते हैं। बहुत से पक्षी भिंडावास झील के अलावा आसपास स्थित गांवों के ताल-तालाबों में भी ठहर जाते है। अंडे देने के बाद बच्चों की देखभाल करते हैं। धूप की तल्खी बढ़ने के बाद ये अपने बच्चों को लेकर वापस साइबेरिया चले जाते हैं। अबकी बार भी काफी विदेशी पक्षी आए हैं। मगर गांव मांडोठी में हुई इस घटना ने पक्षी प्रेमियों और वन्य जीव विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
- पोस्टमार्टम कराकर सेंपल भेजे मधुबन लैब, आरोपियों पर जुर्माना
- बुधवार की शाम को 35 मृत साइबेरियन पक्षियों सहित काबू किए गए थे चार युवक