अमर उजाला ब्यूरो
बादली।
तहसील कार्यालय बादली पिछले कई दिनों से सुर्खियों में है। कभी भ्रष्टाचार तो कभी अनियमिताओं के मामले सामने आ रहे हैं। बुधवार को एक महिला से रजिस्ट्री के नाम पर 38 हजार रुपये मांगने का मामला सामने आया है। महिला ने इसकी शिकायत तहसीलदार से की तो अफरा-तफरी मच गई। इस बारे में तहसीलदार और नायब तहसीलदार के बीच अच्छी खासी बहस भी हुई। तहसीलदार ने जिला उपायुक्त को मामले की लिखित में शिकायत भेज दी है।
गांव शाहपुर जट (दिल्ली) निवासी आशा रानी ने तहसीलदार को शिकायत देते हुए कहा कि उसने बाढ़सा गांव में 380 वर्ग गज जमीन खरीदी है और इसी जमीन की रजिस्ट्री के लिए वह बुधवार को बादली तहसील में आई थी। सभी कागज पूरे होने पर भी एक व्यक्ति ने उससे तहसीलदार के नाम पर 38 हजार रुपये की मांग की। महिला की शिकायत पर तहसीलदार कंवल सिंह ने संबंधित कर्मचारियों और नायब तहसीलदार को कार्यालय में बुलाया। इस दौरान तहसील परिसर में अफरा-तफरी मच गई। रुपये किसने मांगे इस बात पर तहसीलदार की नायब तहसीलदार और अन्य कर्मचारियों के साथ तीखी बहस हुई। काफी बहस के बाद तहसीलदार ने काम करवा कर रजिस्ट्री महिला को सौंप दी।
सरकारी फीस भी नहीं वसूली
बुधवार को महिला की जिस रजिस्ट्री को लेकर विवाद हुआ उस रजिस्ट्री की सरकारी फीस करीब पांच हजार रुपये भी वसूल नहीं की गई थी। रजिस्ट्री कार्य पूरा होने के बाद अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला आया कि आखिर रजिस्ट्री क्लर्क ने बिना फीस वसूल किए रजिस्ट्री कार्य पूरा कैसे करा दिया। नायब तहसीलदार के हाथों से भी रजिस्ट्री जाने के बाद सरकारी फीस न वसूलने का खुलासा हुआ। जिस पर रजिस्ट्री क्लर्क की भूमिका पर भी संदेह किया जा रहा है कि आखिर उन्होंने सरकारी फीस क्यों नहीं वसूल की।
आखिर किसने मांगे पैसे
तहसीलदार के नाम पर महिला से पैसे मांगने वाला व्यक्ति कौन था और क्या काम करता है इस मामले में पूरी तरह से महिला भी नहीं जानती। महिला ने बताया कि वह उसे पहचान सकती है, मगर उसे जानती नहीं है। तहसीलदार ने भी रजिस्ट्री क्लर्क और नायब तहसीलदार को पहचान के लिए महिला के सामने बुलाया। अब इस मामले में जांच का विषय यह है कि आखिर तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री के नाम पर पैसों का लेन-देन कौन कर रहा है।
तहसीलदार की कार्रवाई से संतुष्ट महिला
महिला आशा ने रजिस्ट्री मिलने के बाद तहसीलदार कंवल सिंह यादव का धन्यवाद किया। महिला ने पत्रकारों को बताया कि पहले उससे रजिस्ट्री के नाम पर जो पैसे मांगे गए थे। वह उतने पैसे देने में असमर्थ थी। मगर तहसीलदार को शिकायत देने के बाद उनकी रजिस्ट्री सरकारी फीस के आधार पर हुई है और इंतकाल के लिए भी पटवारी को रजिस्ट्री सौंप दी है।
क्या कहते हैं तहसीलदार
तहसीलदार कंवल सिंह यादव का कहना है कि उनके पास रजिस्ट्री करने का अधिकार नहीं है। पैसे मांगने का मामला संज्ञान में आते ही उच्च अधिकारियों को जांच कि लिए भेज दिया गया है।
वहीं, नायब तहसीलदार अजय कुमार का कहना है कि पैसे के लेने की मांग करने का मामला महिला द्वारा संज्ञान में लाया गया, मगर पैसे तहसीलदार के नाम पर किसने और क्यों मांगे इसकी जांच होनी चाहिए। क्योंकि उन्होंने किसी से रुपये की मांग नहीं की।