स्थानीय सामान्य अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के चलते इलाज करवाने आ रहे मरीजों को ठीक से इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते मरीजों को गिना इलाज कराए भी घर लौटना पड़ रहा है। इस पूरी समस्या की जड़ अस्पताल में डॉक्टर की कमी है। इन दिनों अस्पताल में ओपीडी के लिए करीब 1500 मरीज रोज आते हैं, जबकि डॉक्टरों की संख्या मात्र दस है। अस्पताल में जो भी डॉक्टर है के केवल पांच से छह घंटे ही ओपीडी करते है।
ऐसे में अगर हिसाब लगाकर देखाया जाए तो 1500 मरीजों की ओपीडी व 6 घंटे का ड्यूटी टाइम होने के कारण प्रत्येक मरीज को 2 से ढाई मिनट का ही समय मिल पाता है। जिसमें मरीज का ठीक तरीके से इलाज नहीं हो पाता। वह अस्पताल में आकर घंटों लाइन में लगते हैं और इलाज के नाम पर दो मिनट में पर्चा लिखकर आगे भेज दिया जाता है। जबकि मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया की गाइड लाइन के अनुसार एक मरीज को 15 से बीस मिनट का देना होता है समय होता है।
इससे मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पाता और वह आगे भी परेशान रहता है। अगर अस्पताल के पिछले आंकड़ों को देखा जाए तो एक माह पहले यहां ओपीडी की संख्यां 1000 के करीब रहती थी, लेकिन मौसम में आए बदलाव के साथ-साथ मरीजों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। उसी हिसाब से अस्पताल में स्टाफ में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। जिसके कारण मरीजों को इलाज करवाने के लिए काफी देर तक लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। इस गर्मी के मौसम में बच्चे को गोद में उठाए आखिर एक महिला के लिए इंतजार करने में आई परेशानी उसकी बीमारी को घटाने की बजाय बढ़ाने का काम कर रही है। इस पर भी अस्पताल के आला अधिकारी कोई सुध नहीं ले रहे हैं।
क्या है ओपीडी के लिए गाइड लाइन
सभी सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों की ओपीडी के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने जो गाइड लाइन निर्धारित कर रखी है उसमें एक मरीज को डॉक्टर द्वारा 15 से 20 मिनट का समय देकर मरीज की ठीक तरीके से जांच करने का प्रावधान है। जबकि सरकारी अस्पतालों में भीड़ के कारण इतने कम समय में मरीजों को निपटाया जाता है जिससे मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पाता। सरकारी अस्पतालों में दूसरी बड़ी समस्या है भी है कि यहां कार्यरत सीनियर डॉक्टर मरीजों का नहीं देखते हैं। जिससे मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
किन बीमारियों की बढ़ी ओपीडी
बदलते मौसम के कारण एलर्जी व अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही शिशुओं में खसरे व चिकन पोक्स की बीमारियों ने भी पैर जमाने शुरू कर दिए हैं। इसके साथ ही स्किन से संबंधित रोगों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इस समय गेहूं की कटाई व कढ़ाई का काम जारों पर चल रहा है। जिसके कारण अस्थमा के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि बढ़ती धूप की वजह से चमड़ी सूख जाती है, जिसके कारण त्वचा संबंधित रोग बढ़ रहे हैं।
ऐसे करें बीमारियों से बचाव
इस बारे में त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ रविकांता ने बताया कि बदलते मौसम में बीमारियों से बचाव के लिए बासी खाने से बचे, फ्रिज में रखे खाने को गर्म करके खंाए, बच्चों को धूल में खेलने से बचाएं, धूप में निकलते समय शरीर को कपड़ों से ढक कर रखें। उन्होंने कहा कि अगर इस प्रकार की सावधानियों पर गौर किया जाए तो हम काफी हद तक बीमारियों से बचे रह सकते हैं।
ऐसी है डॉक्टरों की संख्या :
जरनल सरजरी में - एक
ओरथो के लिए -दो
शिशु रोग विशेषज्ञ- तीन
ईएनटी के लिए - दो
फीजीशियन- एक
त्वचा संबधित बीमारियों के लिए - एक
आंखों के लिए - एक
मरीजों के लिए के लिए पर्याप्त समय दिया जा रहा है। बीमारी के हिसाब से मरीज की जांच करने में समय कम भी लग सकता है और ज्यादा भी। डॉक्टरों की कमी के कारण किसी मरीज को परेशानी नहीं होने दी जा रही है। अगर ओपीडी में इससे ज्यादा वृद्धि होती है तो ही डाक्टरों की कमी की समस्या खल सकती है।
- एसएमओ डा. मुरारी