राजकीय स्कूलों में कार्यरत कंप्यूटर टीचरों की अनुबंध अवधि 31 मई को समाप्त होने के बाद विभाग की ओर से दोबारा ज्वाइनिंग के कोई आदेश जारी नहीं किए गए हैं। जिसके चलते राजकीय स्कूलों में स्थित कंप्यूटर लैबों पर ताले लटक गए हैं। ऐसे में राजकीय स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा कैसे मिलेगी। इस बात पर भी सवालिया निशान लग गया है। उधर, कंप्यूटर टीचरों के समक्ष भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। कंप्यूटर टीचरों का कहना है कि अगर अनुबंध अवधि नहीं बढ़ाई जाती है तो उनकी भूखा मरने की नौबत आ जाएगी। ऐसे में कंप्यूटर टीचर और विद्यार्थियों दोनों बीच मझधार में फंसे हुए हैं। जिले भर के राजकीय स्कूलों में करीब 180 कंप्यूटर टीचर कार्यरत थे।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने सभी राजकीय स्कूलों में करीब 2600 कंप्यूटर टीचरों का अनुबंध 31 मई को समाप्त होने पर सेवा मुक्त कर दिया है। इस दौरान सरकार ने हटाए गए कंप्यूटर टीचरों के स्थान पर अनुबंध के आधार पर ही 3336 टीचर लगाने का फैसला लिया था। सरकार के इस फैसले के खिलाफ कंप्यूटर टीचर कोर्ट में चले गए थे। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अगली सुनवाई की तिथि 15 नवंबर तय कर दी है। जिसके चलते कंप्यूटर टीचरों की भर्ती नवंबर तक लटक गई है। जिसके चलते कंप्यूटर टीचर भी चिंतित दिखाई दे रहे हैं।
क्या कहते हैं कंप्यूटर टीचर
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बादली में कार्यरत कंप्यूटर टीचर विकास बिंद्रा का कहना है कि न इधर के रहे न उधर के। परिवार का गुजारा कैसे होगा, इस बात की चिंता सता रही है।
कंप्यूटर टीचर नरेश राठी ने बताया कि भविष्य की चिंता सताने लगी है। महंगाई दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है और रोजगार छीन गया है। सरकार से भी कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही है। बहुत परेशानी हो रही है। इसके अलावा कंप्यूटर टीचर लक्ष्मी, मंजू, ज्योति आदि ने भी सरकार के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की है।
क्या कहते हैं विद्यार्थी
छात्र रोहित ने बताया पहले स्कूल में कंप्यूटर के बारे में जानकारी दी जाती थी। छुट्टियों के बाद स्कूल खुले हैं तो कंप्यूटर की पढ़ाई नहीं हो रही है। कंप्यूटर लैब सारा दिन बंद पड़ी रहती हैं।
छात्रा दीपिका ने बताया कि छुट्टियों के बाद स्कूल में आए है तब पता चला है कि कंप्यूटर टीचरों को हटा दिया है। अब कंप्यूटर की पढ़ाई नहीं होगी। अगर नियमित रूप से पढ़ाई नहीं होगी तो जो पहले सीखा हुआ है, वो भी भूल जाएंगे।
कंप्यूटर टीचर न होने के चलते विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्कूलों में लैब सहायक भी नहीं है। जिसके चलते परेशानी हो रही है। विभाग की ओर से कंप्यूटर टीचरों के बारे में कोई आदेश नहीं आया है।
-रणबीर सिंह कादयान, प्राचार्य राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, झज्जर।
स्कूलों में न तो कंप्यूटर टीचर हैं और न ही लैब सहायक। बच्चों की पढ़ाई तो प्रभावित हो ही रही है। साथ में स्कूल के कंप्यूटर संबंधित कार्य करवाने के लिए भी साईबर कैफों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
-राजबीर सिंह दहिया, प्राचार्य राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, भदानी।