फोटो 71: इंडस्ट्री क्षेत्र में अवैध कालोनियों में विकसित किए जा रहे प्लॉट।
बादली। दादरी तोए और याकूबपुर गांव में अवैध कॉलोनियां लगातार विकसित हो रही हैं। बिल्डर मनमर्जी से अपना लेआउट प्लान बनाकर यहां प्लॉटों की बिक्री कर रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि क्षेत्र में डीलरों को कार्यालय भी बने हैं। मोबाइल के माध्यम से इनकी मार्केटिंग हो रही है और सस्ते एवं आसान किस्तों पर प्लॉट उपलब्ध कराने के उपभोक्ताओं को ऑफर दिए जा रहे हैं। यही वजह है कि खरीदार इनके झांसे में आ रहे हैं और अवैध काॅलोनियों में प्लॉटों की खरीद रहे हैं।
कार्रवाई के नाम पर तहसीलदार और डीटीपी कभी कभार तोड़फोड़ कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर देते हैं, जबकि किसी भी बिल्डर पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती हैं। जिला प्रशासन की ओर से सख्त आदेश हैं कि कहीं भी अवैध कॉलानी विकसित नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद साठगांठ से बेधड़क अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं।
बढ़ रही छोटी-बड़ी कॉलोनियां
दादरी तोए और याकूबपुर गांव में 25 से 35 छोटी-बड़ी अवैध कॉलोनियां हैं। इनमें 12 से 22 हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से जमीन बेची जाती है। इसमें बिल्डर सीवर डलवाने, बिजली की लाइन देने व रास्ता बनाकर देने का दावा करते हैं। वहीं, बाद में इन्हीं वादों पर खरीदारों से विवाद होता है।
अवैध कॉलोनी से नुकसान
बिल्डरों की ओर से काटी जा रही अवैध कॉलोनी से अधोसंरचना विकसित नहीं हो पाती। बिजली-पानी, सीवर, सड़क सहित अन्य दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बैंक व अन्य कोई निर्माण एजेंसी कोई भी राशि उपलब्ध नहीं करवाती, जबकि सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं होते। डीटीपी की ताेड़फोड़ संबंधी कार्रवाई से खरीदार को नुकसान होता है जबकि कॉलोनाइजर प्लॉट बेचकर निकल जाते हैं।
अवैध कॉलोनी काटने पर सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। कुछ कॉलोनियों को वैध करने की फाइल लगी हैं। इसके अलावा जहां भी अवैध प्लॉट काटे जा रहे हैं, वहां जिला योजनागार विभाग तोड़फोड़ करते हैं। लगातार लोगों से अपील की जाती है कि वह विभाग से जानकारी लेने के बाद ही जमीन खरीदें।
- अजय सैनी, तहसीलदार बादली।