आतिशबाजी का धुआं अब जहर बनकर लोगों की सांसों में घुल रहा है। घर से निकलते ही अब सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। शुक्रवार को एक्यूआई खतरनाक स्तर पर 446 पहुंच गया है। जो कि मानक में गंभीर माना जाता है। अगर यही हाल रहा तो 500 के पार भी हो सकता है। सुखद बात यह है कि अब तक आंखें बंद किए बैठा प्रशासन एनजीटी के निर्देश पर थोड़ा जागा है। पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण व राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर जिले में स्थित हॉट मिक्स प्लांट, स्टोन क्रशर, पीएनजी को छोड़कर कोयले अथवा किसी अन्य इंधन को उपयोग करने वाली औद्योगिक इकाईयों के साथ ही किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर पांच नवंबर तक पूर्णतया पाबंदी लगाई गई है। नगर परिषद बहादुरगढ़, नगर पालिका झज्जर सहित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को नियमित मॉनीटरिंग करने के भी आदेश दिए ताकि जिले में किसी भी रूप से पर्यावरण प्रदूषित न हो और आदेशों की अनुपालना प्रभावी ढंग से हो सके।
शाम तक छाया रहा स्मॉग
झज्जर शहर में अलसुबह से शाम तक स्मॉग छाया रहा। हालांकि दिन में कुछ समय तक जरूर धूप खिली थी। लोग घरों से बाहर जरूरी कार्यों के लिए निकल रहे हैं तो उन्हें आंखों में जलन व एलर्जी की समस्या आ रही है। ऐसे हालात में लोगों को समझ आ रहा है कि दिवाली पर आतिशबाजी कर खुशी मना रहे थे, उसका असर क्या होता है।
चिकित्सकों ने दी पार्क में न जाने की सलाह
चिकित्सकों के अनुसार जब तक प्रदूषण की मात्रा अधिक है तब तक बच्चे, युवा, बुजुर्ग घरों से बाहर पार्क आदि में व्यायाम के लिए न जाएं। बढ़ते प्रदूषण में स्वास्थ्य को लेकर आमजन की सजगता बेहद जरूरी है। सांस के मरीजों व बच्चों को भीड़ वाली जगहों पर नहीं जाना चाहिए तथा घर से बाहर निकलते समय काले चश्मे का प्रयोग किया जाए।
वायु प्रदूषण करने वाली इकाईयों के विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वायु प्रदूषण को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित एनसीआर में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित की गई है। पांच नवंबर तक ऐसी इकाईयों को बंद रखने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
संजय जून, डीसी, झज्जर।