दिवाली पर्व में पांच दिन शेष है। बाजारों में चहल-पहल नजर आने लगी है, लेकिन मिट्टी के दीये बनाने वाले लोग चाइनीज लाइटों की मार झेल रहे हैं। मिट्टी के दीये बनाने वाले कारीगरों का तर्क है कि पांच-छह वर्ष पहले मिट्टी के दीयों की खूब मांग होती थी, लेकिन जब से चाइनीज लाइटें बाजार में पहुंची है मिट्टी के दीयों की मांग कम हो गई है। इससे उनके व्यापार पर भी काफी फर्क पड़ रहा है। कारीगरों ने सरकार से मांग की है कि बाजार में पहुंचने वाले चाइनीज आइटमों को बंद किया जाए, ताकि वे अपना भरण पोषण ठीक ढंग से कर सकें।
बहादुरगढ़ में लाइनपार क्षेत्र के 22 फुटा रोड पर मिट्टी के दीये बनाने वाले राजेंद्र कुमार का कहना है कि वे मिट्टी के दीये बनाने के अलावा मटके, कटोरे, सकोरे बनाने का काम करते हैं, लेकिन इन दिनों वे मंदी और चाइनीज लाइटों का शिकार हो रहे हैं। बाजार में पहले मिट्टी के दीयों की खूब मांग होती थी। इससे दिवाली पर्व पर उनका व्यापार सही रहता था। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि बहादुरगढ़ में बहुत कम लोग मिट्टी के दीये खरीद रहे हैं। ऐसे में उन्हें अन्य प्रदेशों की ओर रुख करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि वे अपने दीये दिल्ली और गुरुग्राम में बेचने के लिए पहुंचते हैं। वहीं झज्जर रोड पर डाकघर के साथ वाली गली में मिट्टी के दीये बनाने का काम करने वाले कारीगर सुमेर सिंह का कहना है कि सरकार को चाहिए कि बाजार में चाइनीज आइटम न पहुंचे। इससे न केवल उन्हें नुकसान हो रहा है बल्कि भारतीय कला और संस्कृति भी लुप्त हो रही है।
बाजार में 10 से 205 रुपये तक के दीये है उपलब्ध
मिट्टी के दीये बनाने में अपने परिवार का सहयोग करने वाली महिला लक्ष्मी ने बताया कि बाजार में मिट्टी के दीये की कई वैरायटी उपलब्ध है। कोई स्टाइलिश दीये खरीदता है तो कोई पारंपरिक। हर वर्ष की तरह उन्होंने काफी संख्या में दीये तैयार किए हैं। कारीगर राजेंद्र ने बताया कि हमारे पास कई प्रकार दीये के उपलब्ध है। इनकी कीमत 10 रुपये से लेकर 250 रुपये तक है। वहीं बल्ली ने बताया कि वह पिछले चार महीने से दिवाली की तैयारियों में जुटे हुए हैं।