जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान युवाओं पर बनाए गए मुकदमों को रद्द करने की मांग गुलिया खाप ने उठाई है। खाप के सौंधी चबूतरे पर हुई पंचायत में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि सरकार और मंत्रियों के सामने मुकदमे वापस लेने की मांग को पुरजोर तरीके से रखा जाएगा। पंचायत की अध्यक्षता गुलिया खाप के अध्यक्ष सुनील जहांगीरपुर ने की। सौंधी गांव के चबूतरे पर आयोजित पंचायत में सुनील गुलिया ने मौजूद लोगों को बताया कि गुलिया 30 गांवों के 4 युवाओं पर आरक्षण आंदोलन के दौरान विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमे बनाए गए हैं। युवाओं का परिवार आर्थिक तंगी के साथ-साथ विभिन्न परेशानियां झेलने को मजबूर है। ऐसे में आरक्षण संघर्ष समिति को आगे आते हुए परिवार और युवाओं की मदद करनी चाहिए। सबसे पहले सरकार से मांग की जाएगी कि युवाओं पर बनाए गए मुकदमे रद्द किए जाए। पंचायत में मौजूद जाट आरक्षण समिति की ओर से जितेंद्र बबला ने समिति को चंदे के तौर पर मिले पैसे का ब्योरा भी दिया। खाप ने समिति से युवाओं की आर्थिक मदद करने की मांग की। मुख्यमंत्री से बातचीत के लिए 60 लोगों की कमेटी बनाई गई, जिसमें खाप के लोगों को शामिल किया गया। कमेटी सुनील गुलिया के नेतृत्व में एफआईआर नंबर 113 और 127 को रद्द करवाने के लिए मुख्यमंत्री से मिलेगी। एफआईआर में प्रदेश के 32 युवाओं पर मुकदमे दर्ज है। पंचायत में जिला पार्षद जगबीर निमाना, अमित छनपाड़िया, संदीप दरियापुर, महाबीर पेलपा, काला लाडपुर, मलखान सिंह, सुमेर सिंह, चांद लगरपुर और रणबीर गुलिया सहित काफी संख्या में गुलिया खाप के ग्रामीण मौजूद रहे।
सही तरीके से की जा रही मुकदमे की पैरवी : वकील
आंदोलन के दौरान गुलिया खाप के खेड़ी जट्ट गांव रजनेश, राजेश, ओम भगवान और खुंगाई के देवेंद्र पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पंचायत में 3 युवक मौजूद रहे। युवाओं ने पंचायत में बताया कि वकील रणधीर सिंह सही तरीके से बातचीत नहीं कर रहे है। जवाब में वकील रणधीर सिंह ने बताया कि वह मुकदमों की पैरवी मजबूती और सही तरीके से की जा रही है। पंचायत में एक पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया जो कि मुकदमे से संबंधित चर्चा करेगी।
जाट मंत्रियों से मांगेंगे मदद
पंचायत में जाट मंत्रियों में ओमप्रकाश धनखड़ और वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को लेकर मंथन किया गया। सबसे ज्यादा चर्चा हलके के विधायक एवं मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ की हुई। पंचायत में कुछ लोगों ने मंत्री का विरोध किया तो कुछ लोगों ने मंत्री से मदद मांगने पर जोर दिया। बाद में फैसला लिया गया कि सामाजिक व्यक्ति मंत्री को माध्यम बनाकर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मुकदमे रद्द करवाने की मांग करेंगे।