फास्टैग सिस्टम शुरू तो हो गया है, लेकिन फास्टैग बनाने वाली कंपनियों की मनमानी से वाहन चालकों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई दिन पहले आवेदन करने के बावजूद कई वाहन चालकों को फास्टैग नहीं मिल पाए हैं। कंपनियों की ढिलाई की वजह से ऐसे वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर जुर्माना भरना पड़ा रहा है। रविवार से फास्टैग व्यवस्था शुरू हो गई। व्यवस्था का सुचारु ढंग से लागू करने के लिए रोहद टोल पर पूरी व्यवस्था की गई थी। शाम चार बजे तक कोई विवाद की स्थिति तो पैदा नहीं हुई लेकिन फास्टैग न लगाने वाले वाहन चालकों पर जुर्माना देना पड़ा। इनमें से कुछेक वाहन चालक वे थे, जिन्होंने फास्टैग के लिए आवेदन तो किया हुआ था लेकिन गाड़ी पर चिपका न होने के कारण जुर्माना भरना पड़ा। जब इन चालकों ने टोल कर्मियों से कहा कि उन्होंने फास्टैग के लिए अप्लाई किया है तो टोल कर्मियों ने कहा कि गाड़ी पर फास्टैग चिपका नहीं होगा तो जुर्माना तो देना ही पड़ेगा। रोहतक निवासी सुमित शर्मा को भी जुर्माना भुगतना पड़ा। सुमित के मुताबिक, उन्होंने पेटीएम पर फास्टैग के लिए आवेदन किया था लेकिन अभी तक फास्टैग नहीं मिला। इस वजह से उन्हें 100 रुपये ज्यादा देने पड़े। वहीं साहिल और राहुल आदि ा भी यही कहना था कि उन्होंने पेटीएम पर काफी दिन पहले फास्टैग के लिए आवेदन किया है लेकिन उक्त कंपनी की लापरवाही के कारण हमें जुर्माना भुगतना पड़ा। इसमें हमारी गलती क्या है?
फास्टैग व्यवस्था सुचारु ढंग से जारी है। जिन गाड़ियों पर फास्टैग नहीं लगा, उनसे जुर्माने सहित शुल्क लिया जा रहा है। जुर्माने से बचना है तो चालक अपने वाहनों पर फास्टैग जरूर लगाएं।
इंगलेश शर्मा, सीआरओ, रोहद टोल प्लाजा।