दिवाली पर हुई आतिशबाजी से फैला प्रदूषण अभी तक इलाके की फिजा में घुला हुआ है। आसमान में स्मॉग की चादर बनी हुई है। बुधवार को इलाके में पीएम 2.5 का स्तर 330 रहा। यह स्तर लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। उधर, डॉक्टरों ने लोगों से बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।
इन दिनों क्षेत्र में वायु प्रदूषण के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में चिकित्सकों ने दमा के मरीजों के साथ-साथ बच्चों को सलाह दी है कि वे इस मौसम में घर से बाहर निकलने से बचें। बहादुरगढ़ के ब्रह्मशक्ति संजीवनी अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. मनीष शर्मा का कहना है कि इन दिनों सांस लेने में परेशानी को लेकर ज्यादा मरीज आ रहे हैं। बुजुर्गों के साथ युवा व बच्चे भी शामिल हैं। दिवाली के बाद सांस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। दमा के मरीजों के लिए वायु प्रदूषण जहर के बराबर है। ऐसे व्यक्तियों के लिए प्रदूषण से बचाव ही एकमात्र इलाज है। प्रदूषण के कारण मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। दम घुटना, सांस लेते समय आवाज होना, सांस फूलना, छाती में कुछ जमा होना व भरा हुआ महसूस होना, बहुत खांसने पर चिकना कफ आना इसके लक्षण हैं। वायु प्रदूषण के कारण उन महिलाओं में स्ट्रोक की संभावना 40 प्रतिशत ज्यादा बढ़ जाती है जो ज्यादा समय प्रदूषण में रहती हैं। प्रदूषण के कारण मस्तिष्क को रक्त आपूर्ति में रुकावट होती है और यही कारण जोखिम बढ़ा देता है।
दो और दिन बंद रहेंगी फैक्ट्रियां
प्रदूषण की स्थिति को लेकर कोयले से चलने वाली फैक्ट्रियां दो दिन और बंद रहेंगी। ईपीसीए की ओर से इन फैक्ट्रियों को कोई राहत नहीं दी गई है। शुक्रवार को ईपीसीए की बैठक होगी। बैठक में कोयले से चलने वाली फैक्ट्रियों को लेकर कोई फैसला लिया जा सकता है।