बहादुरगढ़। नगर परिषद की ओर से पिछले कुछ महीने में लगाए गए करोड़ों की राशि के टेंडरों को खोलने और लगाने में न तो प्रधान की अनुमति ली गई और ना ही ईओ की। कई टेंडरों के वर्क आर्डर भी दोनों की अनुमति के बिना ही दिए गए। ऐसे में कार्यकारी अधिकारी संजय रोहिल्ला ने कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) और पालिका अभियंता (एमई) से स्पष्टीकरण मांगा है।
एमई ने टेंडर लगाने और खोलने के लिए एक्सईएन को जिम्मेदार ठहराया है, मगर एक्सईएन ने अभी तक इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया है। हालांकि एक्सईएन ने खुद को ही टेंडर लगाने और खोलने का प्राधिकृत अधिकारी बताया है। ऐसे में नगर परिषद के अधिकारियों की ओर से इस विषय में शहरी स्थानीय निकाय मुख्यालय से भी स्पष्टीकरण मांगा जा सकती है, ताकि टेंडरों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके और पारदर्शिता भी बनी रहे।
वर्जन...
कार्यकारी अधिकारी की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण का जवाब मैंने दे दिया था।अपने जवाब में लिखा था कि टेंडर प्रक्रिया मेरे द्वारा नहीं बल्कि एक्सइएन द्वारा की जाती है। रही बात एचइडब्ल्यूपी पोर्टल पर टेंडर इनवाइट करने और खोलने का तो इस बारे में एक्सइएन के पास अप्रूवल लैटर आया हुआ है।
-राजेश कौशिक, पालिका अभियंता, नगर परिषद, बहादुरगढ़।
वर्जन.....
एचइडब्ल्यूपी पोर्टल की एसओपी के अनुसार ही सारे टेंडर लगाए गए हैं और खोले जा रहे हैं। टेंडर लगाने का अधिकार तो केवल एक्सइएन का ही है। टेंडर खोलते समय स्पोर्टिंग डिजिटल सिग्नेचर चाहिए। वो एमई के भी चल सकते हैं और ईओ के भी। ऐसे में एमई के सिग्नेचर के साथ सभी टेंडर खोले गए हैं। नियमों की अवहेलना बिल्कुल भी नहीं की गई है।
-डालचंद शर्मा, कार्यकारी अभियंता, नगर परिषद, बहादुरगढ़।
वर्जन.....
नगर परिषद में वित्तीय अधिकार कार्यकारी अधिकारी और प्रधान के पास होते हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्वीकृति के बाद भी टेंडरों की वित्तीय बिड खोलने से पहले कार्यकारी अधिकारी और प्रधान की लिखित अनुमति लेनी जरूरी है। साथ ही कार्यकारी अधिकारी के डिजिटल सिग्नेचर भी जरूरी हाेते हैं। मैंने दोनों तकनीकी अधिकारियों से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा था। इस बारे में एमई का जवाब मिल गया है, लेकिन एक्सइएन का जवाब नहीं मिला है। इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। टेंडरों में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार की हिदायतों की पालना करना उचित है।
-संजय रोहिल्ला, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, बहादुरगढ़।