स्कूल में सैनिटाइजर का छिड़काव करते कर्मचारी।
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झज्जर। कोरोना वैश्विक महामारी से बचाव के लिए मार्च में बंद हुए शिक्षण संस्थान सोमवार से खुल रहे हैं। हालांकि इस दौरान रेगुलर क्लास नहीं लगेंगी। नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थी पढ़ाई में आ रही कठिनाइयों का हल जानने स्कूल आ सकेंगे। इसलिए अभिभावकों की स्वीकृति अनिवार्य होगी। वहीं, शिक्षकों को भी स्कूल में आने से पहले अपना कोरोना टेस्ट कराना जरूरी होगा, नहीं तो उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
स्कूल में पहुंचने वाले हर बच्चे की गेट पर स्क्रीनिंग करवाई जाएगी। इसके अलावा एक बेंच पर एक ही विद्यार्थी को बैठाने की व्यवस्था की गई है। सभी कमरों में सैनिटाइजर का छिड़काव स्कूलों की तरफ से करवाया गया है। इसके अलावा स्कूलों में सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजर, मास्क की भी व्यवस्था की गई है, ताकि संक्रमण से बचा जा सके। करीब पांच में से सुनसान पड़े स्कूलों में अब धीरे-धीरे चहल-पहल लौटनी शुरू होगी। सरकार की तरफ से लॉक डाउन लागू होने से पहले ही शिक्षण संस्थाओं को बंद करने के आदेश जारी कर दिए थे। बच्चों की परीक्षाएं तक पूरी नहीं हो पाई थी। अब सरकार ने 21 सितंबर से स्कूलों को डाउट क्लास के लिए सशर्त खोलने के आदेश जारी कर दिए हैं। जिले में करीब 700 निजी व सरकारी स्कूल हैं। वहीं शिक्षकों की संख्या करीब 17 हजार से ज्यादा है।
स्कूलों में नौवीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को बुलाया जाएगा। कक्षाएं नहीं लगाई जाएंगी। केवल बच्चों को डाउट क्लियर करने के लिए ही स्कूलों में बुलाया जाएगा, ताकि वे पढ़ाई के दौरान आने वाली दिक्कतों का समाधान करवा सकें। सरकार की तरफ से जारी निर्देशों की पालना करनी आवश्यक है। सभी स्कूलों को एसओपी से अवगत करा दिया गया है।
- दिलजीत सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी, झज्जर।