भारत समेत हरियाणा में साल का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को लगा। यह चंद्रग्रहण पूरे भारत में दर्शनीय है, इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सूतक काल लगने पर भगवान के दर्शन नहीं किए जा सकते और न ही पूजा-पाठ के कार्य किए जाते हैं। शहर के मंदिरों में चंद्र ग्रहण के कारण प्रातः काल के बाद धार्मिक कार्य नहीं किए जा सके।
हरियाणा में सुबह से बंद रहे मंदिरों के द्वार
मान्यतानुसार ग्रहण के दौरान श्रद्धालुओं ने अपने घरों और पुजारियों ने मंदिरों में मंत्र जाप किया। मंगलवार को सुबह 6:20 से मंदिरों के मुख्य द्वार बंद रहे। झज्जर के सिद्ध बाबा कांशी गिरि महाराज मंदिर के पंडित पवन कौशिक ने बताया कि हिन्दू धर्म में ग्रहण को लेकर कुछ परंपराएं प्राचीन समय से चली आ रही हैं। ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ भोजन और सोने पर भी इसका असर पड़ता है। हरियाणा में दोपहर 3:20 से शाम 6:45 तक चंद्रग्रहण रहेगा।
क्या बोलते हैं शास्त्र?
इन्हीं परंपराओं में से एक परंपरा मन्दिर के द्वार बंद किए जाना है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस अवधि के दौरान मानसिक तौर पर पूजा पाठ और मंत्रों का जाप करना विशेष रूप से फलदायी होता है। चंद्र ग्रहण का सूतक नौ घंटे पहले ही लग गया है। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल साधना, जप और आत्मचिंतन का समय है।
पंडित देवेश शर्मा ने बताया कि इस दौरान ब्रह्मपूजा को विराम देकर आंतरिक एकाग्रता पर बल दिया जाता है। यही कारण है कि ग्रहण के दौरान मंदिरों के द्वार बंद किए जाते हैं और शुद्धिकरण के पश्चात ही नियमित पूजा-अर्चना शुरू होती है जिसके कारण सूतक में मंदिरों के मुख्य द्वार बंद रहे। मंदिरों के द्वार ग्रहण समाप्त होने के बाद साफ-सफ़ाई और शुद्धिकरण के बाद खोले जाएंगे।