बहादुरगढ़। शादियों का सीजन चल रहा है। 30 अप्रैल को अक्षय तृतीय का पर्व है। शादियों वाले घरों में नए नोटों की काफी जरूरत होती है, लेकिन लोगों को बैंकों से नए नोटों की गड्डियां नहीं मिल रही हैं। जबकि बाजार में दुकानों पर नोटों की गड्डियों की खूब कालाबाजारी हो रही है। शादियों के सीजन में नोटों की गड्डियों के रेट भी बढ़ गए हैं। शादियों के सीजन में नोटों की डिमांड बढ़ी हुई है। ऐसे में इन दिनों इनके रेट में रोजाना परिवर्तन हो रहा है। जैसे-जैसे सहालग की मुख्य तारीखें नजदीक आती है, उसी तरह इनके रेट भी बढ़ रहे हैं।
अक्षय तृतीया के दिन क्षेत्र में 100 से अधिक जोड़े परिणय सूत्र में बंधेंगे। सभी होटल, बैंक्वेट हॉल, वाटिका समेत धर्मशालाओं की बुकिंग फुल है। ऐसे में इससे पहले ही शादियों के सीजन में नोटों की गड्डियों की मांग बढ़ रही है। बैंकों से 1, 2, 10, 20 व 50 के नोटों की गड्डियां नहीं मिल रही हैं। जबकि बहादुरगढ़ शहर में कई दुकानों से यह गड्डियां आसानी से उपलब्ध हो रही हैं, लेकिन एक रुपये के नोट के लिए 15 रुपये और 2 रुपये के लिए 25 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं 10 के नोट की गड्डी 1400 से 1500 रुपये में और 20 रुपये के नोट की गड्डी 2250 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
शहर के विवेकानंद नगर में रहने वाले सतिंदर कुमार ने बताया कि उनके घर पर 30 अप्रैल को शादी है। शादी में एक के नोट की गड्डी के अलावा 10, 20, 50 और 100 रुपये के नोट की गड्डी की विशेष जरूरत है। गड्डियों के लिए बैंक में पता किया तो वहां से 100 रुपये के नोट की गड्डी तो आसानी से मिल रही है, लेकिन 1, 2, 10 और 20 रुपये के नोट के लिए मारामारी हो रही है। वहीं शहर की दुकानों से यह इन नोटों की गड्डी आसानी से उपलब्ध हो रही है, लेकिन दुकानदार इनकी कालाबाजारी करते हुए 10 रुपये के नोट की गड्डी पर 400 से 500 और 20 रुपये के नोट की गड्डी पर 250 से 300 रुपये ज्यादा ले रहे हैं।
नजफगढ़ रोड पर बैंक कॉलोनी निवासी विवेक शर्मा का कहना है कि सरकार को नोटों की कालाबाजारी करने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। जो नोट बैंकों में नहीं मिल रहे हैं वह शहर की दुकानों पर आसानी से मिल रहे हैं। सवाल उठता है कि उन दुकानदारों को यह नोट कहां से मिल रहे हैं।
बैंक में नहीं तो कैसे पहुंच रहे दुकानदारों तक
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइड लाइन के अनुसार नोट को उतनी ही कीमत में चलाया जा सकता है, जितनी उस पर अंकित है। बैंक नए नोट सिर्फ उन्हीं लोगों को देते हैं, जिनके खाते उनके पास होते हैं। खाताधारकों को भी नए नोट नसीब नहीं हो रहे हैं। ऐसे में जब बैंकों में नए नोट मौजूद नहीं हैं तो फिर माला बनाने वालों के पास कैसे पहुंच रहे हैं।
-फोटो 54 : शहर के मेन बाजार में दुकान के बाहर लटकी नोटों की मालाएं। संवाद