जुलाना(जींद)। गांव कमाच खेड़ा का माहौल शनिवार को उस वक्त गमगीन हो गया जब बीएसएफ में तैनात जवान संदीप का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ गांव पहुंचा। परिवार के लोग और ग्रामीण अपने लाडले बेटे को अंतिम विदाई देने पहुंचे। वह चार अक्टूबर को छुट्टी लेकर अपने गांव कमाच खेड़ा घर आने वाले थे, लेकिन ड्यूटी के दौरान उनकी मौत हो गई।
उनकी शहादत ने पूरे क्षेत्र को गर्व और दुख से भर दिया। जानकारी के अनुसार, बीएसएफ जवान संदीप जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। जब उसका शव तिरंगे में लिपटा हुआ गांव पहुंचा तो पूरा मोहल्ला शोक में डूब गया। हर किसी की आंखें नम थीं और लोगों के मुंह से एक ही शब्द निकल रहा था- जय हिंद, शहीद संदीप अमर रहें।
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पीछे तीन बेटियां, एक बेटा और पत्नी को छोड़ गए
39 वर्षीय शहीद संदीप ने देश सेवा में अपने जीवन के 18 वर्ष समर्पित किए थे। वह बीएसएफ में अपने कर्तव्यों का निष्ठा से पालन कर रहे थे। संदीप अपने पीछे तीन बेटियां, एक बेटा और पत्नी को छोड़ गए हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव के लोग परिवार को सांत्वना देने पहुंचे लेकिन किसी के पास शब्द नहीं थे। बलिदानी के छोटे भाई मनदीप ने बताया कि वह स्वयं भी भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके भाई ने हमेशा देश की सेवा को सर्वोपरि रखा और उसी कर्तव्यनिष्ठा के चलते आज वह बलिदानी कहलाए।
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राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी
गांव में हुए अंतिम संस्कार के दौरान संदीप को राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई। इस अवसर पर जुलाना थाना प्रभारी रविंद्र कुमार, स्थानीय प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। बीएसएफ जवानों ने शहीद को सलामी दी।
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शहीद संदीप अमर रहे के नाराें से गूंजा गांव
जैसे ही संदीप का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा, भारत माता की जय और शहीद संदीप अमर रहे के नारे गूंज उठे। पूरा कमाच खेड़ा गांव अपने वीर सपूत की शहादत पर गर्व महसूस कर रहा है लेकिन आंखों से बहते आंसू उस गम को बयां कर रहे थे जो किसी शब्द में नहीं कहा जा सकता।
05जेएनडी28: संदीप कुमार।