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Jhajjar-Bahadurgarh News: मेरी बहन को ला दो, मेरे जीजा को ला दो...

Mon, 04 Nov 2024 03:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
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-फोटो 53 : हादसे पर विलाप करते मृतकों के परिजन। संवाद
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बहादुरगढ़। मेरी बहन को ला दो...और मेरे जीजा को ला दो... यह बात कहते हुए मृतक निशा की बहन ईशा की आंखों से लगातार आंसू आ रहे थे। पास खड़ीं महिलाएं उसके आंसू पोंछते हुए उसे सांत्वना दे रही थी। स्थान था शहर का छोटूराम नगर। यहां शनिवार की देर रात घर में आग लगने के कारण ईशा की बहन निशा और जीजा सिंटू की मौत हो गई थी। इससे न केवल ईशा का बल्कि परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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करीब ढाई साल पहले शादी के बंधन में बंधे सिंटू और निशू ने अपने गृहस्थ जीवन को चलाने के लिए सपने तो खूब संजोए थे, मगर एक रात ने उनके सपना को खाक कर दिया। जब वे नींद के गहरे आगोश में थे तो उनके कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग गई और दंपती जिंदा जल गए। आस पड़ोस के लोगों को जैसे ही इसका पता लगा तो वे भी तुरंत मौके पर पहुंचे और किसी तरह आग बुझाई, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। उनकी मौत से उनके पिता समेत परिवार के हर सदस्य गहरे सदमे में है। सिंटू व निशा के साथ हादसा हुआ है या वे साजिश का शिकार हुए हैं। इसको लेकर थाना लाइनपार पुलिस व एफएसएल की टीम ने मौके से साक्ष्य भी जुटाए हैं। हर एंगल से पुलिस की टीमें इस घटना को सुलझाने में लगी हुई हैं।

2022 में हुई थी निशा की शादी
बिहार के नालंदा के रहने वाले सिंटू ने मायापुरी फेस-2 दिल्ली निवासी निशा के साथ 9 जून 2022 को शादी की थी। घर में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। हंसी-खुशी दंपती अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। मगर भैयादूज की रात को जब वे अपने कमरे में सो रहे थे तो संदिग्ध परिस्थितियों में लगी आग में जल गए। उन्हें बाहर निकलने का समय तक नहीं मिला। कमरे के अंदर ही दोनों जिंदा जल गए। इन्हें बचाने के लिए उनके भतीजे प्रिंस, विक्की और कुनाल जोकि दूसरे कमरे में सो रहे थे वे भी बाहर निकले। मगर चाचा-चाची को बचाने में प्रिंस भी आग की चपेट में आकर बेसुध हो गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। जहां से उसे पीजीआईएमएस रेफर कर दिया।
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मृतक निशा थी दो माह की गर्भवती
मृतका निशा की मां अनीता ने बताया कि उनकी बेटी दो माह की गर्भवती थी। सिंटू और निशा अपने बच्चे को लेकर भी खुश थे। सिंटू आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र में एक चाय की दुकान के साथ पनवाड़ी का काम करता था। आधी रात को एक बजे के करीब लोगों ने कमरे से धुआं उठता देखा तो उन्हें बचाने के लिए दौड़े मगर वे इसमें कामयाब नहीं हो सके।
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