झज्जर। एपीसीपीएल झाड़ली थर्मल पावर प्लांट में समर्पण के तत्वावधान में क्षेत्रीय बायोगैस कार्यशाला एवं प्रदर्शनी का शुभारंभ उपायुक्त स्वप्निल रविंद्र पाटिल ने किया। उन्होंने कहा कि थर्मल पावर प्लांट में बायोमास को-फायरिंग से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा बल्कि किसानों की आय में भी इजाफा होगा। जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक समस्या से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।
डीसी ने कहा कि एक ऐसी आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) विकसित करनी होगी, जो किसानों और बायोमास संस्थानों के बीच सेतु का काम करे। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय को दोगुना करना है और यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सीईओ दिलीप कैवर्त्त ने कहा कि एपीसीपीएल पावर प्लांट प्रदूषण मानकों का पूरी गंभीरता से पालन कर रहा है और एनसीआर क्षेत्र के 11 प्लांट में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य जारी रहेगा। इस दौरान एसएमई और बायोमास क्षेत्र के उद्यमियों के लिए उपलब्ध वित्तीय योजनाओं और प्रोत्साहनों को भी साझा किया गया। वित्तीय संस्थानों के साथ संवाद के जरिए निवेश और ऋण की संभावनाओं पर चर्चा हुई ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में बायोमास उद्यमिता को बढ़ावा मिल सके।
बाॅयोमास के सही उपयोग के लिए दी बधाई
विद्युत मंत्रालय (भारत सरकार) के अपर सचिव पीयूष सिंह ने एपीसीएल को 4.52 लाख मीट्रिक टन से अधिक बॉयोमास के उपयोग और एक राष्ट्रीय मानक स्थापित करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि एपीसीएल की स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह उपलब्धि पराली जलाने की समस्या को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो विशेष रूप से उत्तरी भारत में वायु प्रदूषण का एक मुख्य कारण है।