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Jhajjar-Bahadurgarh News: हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने व प्रदूषण कम करने को की बायोमास बिनेस पार्टनर्स मीट

Fri, 12 Jun 2026 05:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
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11jjrp08 कार्यक्रम के दौरान एपीसीपीएल के अ​धिकारी और अन्य। एपीसीपीएल
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साल्हावास। अरावली पावर कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (एपीसीपीएल) झज्जर की ओर से वीरवार को बायोमास बिजनेस पार्टनर्स मीट का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम देश में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा प्रदूषण कम करने के राष्ट्रीय प्रयासों के तहत आयोजित किया गया।
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कार्यक्रम का उद्देश्य बायोमास आपूर्ति से जुड़े व्यापारिक साझेदारों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना, उनके सुझाव प्राप्त करना तथा बायोमास आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना था। इस अवसर पर 22 बायोमास विक्रेताओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम में एपीसीपीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप कैबोर्त्ता, महाप्रबंधक कैलाश प्रसाद सतपथी, महाप्रबंधक जयोतोष कुमार डे और महाप्रबंधक मोहम्मद निजामुद्दीन सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने उपस्थित होकर प्रतिभागियों को संबोधित किया।
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मुख्य वित्तीय अधिकारी अरुण कुमार, अपर महाप्रबंधक (मेंटेनेंस) अतुल अग्रवाल और सभी विभागाध्यक्ष भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने बायोमास आधारित हरित ऊर्जा पहल को सफल बनाने और साझेदारों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाया।

बायोमास सह दहन में देश में प्रतिशत के आधार पर प्रथम
अपर महाप्रबंधक जसमेर सिंह ने कहा कि एपीसीपीएल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बायोमास सह-दहन (को-फायरिंग) के प्रतिशत के आधार पर एपीसीपीएल झज्जर ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि कंपनी की पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीरता और समर्पण का प्रमाण है।
उपलब्धियां व सर्वाेत्तम कार्यपद्धति की दी जानकारी
अपर महाप्रबंधक अमित के. गौतम ने एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से बायोमास क्षेत्र में प्राप्त महत्वपूर्ण उपलब्धियों और सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बायोमास पेलेट के भुगतान चक्र को 42 दिनों से घटाकर मात्र 15 दिन कर दिया गया है जिससे व्यापारिक साझेदारों को बड़ी सुविधा मिली है। साथ ही पेलेट की गुणवत्ता में सुधार करते हुए उसका आकार 25 मिमी से घटाकर 10 मिमी से कम किया गया है। इससे अनावश्यक पदार्थों की मात्रा कम हुई है और ईंधन की ऊर्जा क्षमता में वृद्धि हुई है। बायोमास आधारित ऊर्जा उत्पादन न केवल कृषि अवशेषों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देता है बल्कि खुले में पराली और अन्य अवशेष जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को भी कम करता है।
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