शहर के नागरिक अस्पताल में बायो मेडिकल जलाकर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अस्पताल में जो भी बॉयो मेडिकल वेस्टेज होता है उसे वहीं अस्पताल में शवगृह के पास डाल दिया जाता है। बाद में मौका मिलते ही अस्पताल प्रशासन इसे जला देता है। जिससे निकलने वाली गैस मनुष्य के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है। इससे लोग बीमार पड़ रहे हैं वहीं अस्पताल प्रशासन भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा और न ही नियमों को पालन कर रहा है।
जबकि बायो मडिकल वेस्टेज को नष्ट करने के लिए कई सारे नियम बनाए गए हैं जिसको अस्पताल प्रशासन खुद ही पालन नहीं कर रहा है। नियम के अनुसार बायो मेडिकल वेस्टेज उठाने के लिए हर महीने का बिल बायो मेडीकल वेस्ट उठाने वाली कंपनी को दिया जाता है। इसके बावजूद सामान्य अस्पताल में लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में न रखकर वेस्टेज को पहले तो खुले में डाल दिया जाता है सप्ताह भर बाद बायो मेडिकल वेस्टेज को वहीं पर जला दिया जाता है। अस्पताल में वेस्टेज खुले में पड़ा बीमारियों को न्यौता दे रहा है, लेकिन अस्पताल प्रबन्धन इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। दवाई के बॉक्स, प्लास्टिक की नलियां, व अन्य कूड़े करकट से भरे हुए पैकेट को सामान्य अस्पताल में खुले में डाला जा रहा है और रात को इनमें आग लगा दी जाती है। जबकि बायो मेडिकल वेस्टेज को जलाया नहीं जाना चाहिए। रात में अस्पताल प्रबंधन द्वारा बायो मेडिकल वेस्टेज लगाने के बाद जब इस बारे में एसएमओ डॉ मुरारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है।
इस तरह के वेस्टेज को जलाना नहीं चाहिए। वेस्टेज जलाने से वायु प्रदूषण होता है और यह अनेकों बीमारियों को जन्म देता है। दो महीने पहले ही नगर पालिका ने यहां से कूड़ेदान को उठवा लिया था बार-बार कहने के बावजूद भी नगर पालिका द्वारा कूड़ादान नहीं रखवाया गया है। इस कारण वेस्टेज बाहर डालना पड़ रहा है। इसमें जल्द ही सुधार होगा।
- डॉ मुरारी, एसएमओ सिविल अस्पताल
स्वच्छता पर नहीं दिया जा रहा ध्यान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2 अक्तूबर 2014 को महात्मा गांधी के जन्म दिवस पर स्वच्छता अभियान चलाया गया था। स्वच्छता अभियान को अभी 2 साल भी पूरे नहीं हुए जबकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस अभियान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अभियान को शुरू करते हुए कहा था कि अगर हर हिंदुस्तानी सफाई को अपनी जिम्मेदारी समझे और ये ठान ले कि गंदगी नहीं करेगा और न ही करने देगा तो दुनिया की कोई भी ताकत भारत को गंदा नहीं कर सकती। लेकिन ये सब बातें स्वास्थ्य विभाग के लिए महज बातें ही रह गई हैं।
बायो मेडिकल वेस्टेज को पहले तो अस्पताल में ही खुले में डाल दिया जाता है और फिर रात के अंधेरे में उन्हें वहीं पर जला दिया जाता है। अस्पताल में आए मरीजों के साथ दोहरा खिलवाड़ किया जा रहा है। नाम कमाने के लिए छोटी बड़ी संस्थाओं द्वारा शुरू श्ुरू में तो स्वच्छता को लेकर अनेकों कार्यक्रम किए गए, लेकिन अब तो स्वास्थ्य विभाग ही लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।