यूरिया की कमी के कारण क्षेत्र के किसानाें को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। जरूरत के मुकाबले में अब तक 20 फीसदी यूरिया ही क्षेत्र में उपलब्ध हो पाया है।
किसान मारे-मारे भटक रहे हैं। सहकारी समिति के बिक्री केंद्र में दस दिन से यूरिया का एक दाना भी उपलब्ध नहीं है, जबकि कृषि विभाग का कहना है कि क्षेत्र में यूरिया की कोई कमी नहीं है।
1 लाख 60 हजार बैग की जरूरत
कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक, बहादुरगढ़ उपमंडल में गेहूं की फसल के लिए करीब एक लाख 60 हजार बैग (प्रति बैग 50 किलो) की जरूरत है।
जबकि अब तक क्षेत्र में करीब 35 हजार बैग खाद ही उपलब्ध हो पाई है। सहकारी समिति के बिक्री केंद्रों पर दस दिन से खाद नहीं आ रहा।
हर रोज सैकड़ों किसानों को खाली लौटना पड़ रहा है। अगर जल्दी ही खाद की आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो गेहूं की अगेती फसल में नुुकसान होना लाजमी है।
इलाके में पैक्स के बिक्री सेंटरा के अलावा कुछ लाइसेंसधारी दुकान भी यूरिया बेच रहे हैं, लेकिन इन दुकानों पर यूरिया महंगा मिल रहा है।
दूसरा, यहां मिलने वाले यूरिया की गुणवत्ता को भी हल्का मान रहे हैं। इसलिए किसान निजी दुकानाें से यूरिया खरीदने से बच रहे हैं।
दिल्ली में कमा रहे मुनाफा
फिलहाल पैक्स और निजी दुकानों में कृभको, आईपीएल, एनएफएल और टाटा का यूरिया उपलब्ध है। सरकार ने 60 फीसद यूरिया पैक्स के माध्यम से और 40 फीसद प्राइवेट सेक्टर के माध्यम से बेचने की व्यवस्था की है।
एक बैग यूरिया की कीमत 280 रुपये है। पैक्स व निजी बिक्री केंद्रों के लिए बराबर दाम निर्धारित किए गए हैं, लेकिन पैक्स में तो यूरिया दस दिन से उपलब्ध है ही नहीं, तो निजी दुकानों में भी कई बार उपलब्ध नहीं हो पाता।
सूत्राें ने बताया कि निजी दुकानदार यूरिया को अपनी दुकानाें पर बेचने के मुकाबले दिल्ली में बेचना ज्यादा फायदेमंद मानते हैं।
हरियाणा में तो उन्हें प्रति बैग 280 रुपए मिलते हैं, जबकि दिल्ली में यह 350 रुपए प्रति बैग तक बिक जाता है। दुकानदार कंपनी से 263 रुपए में यूरिया उठाकर दिल्ली के किसानों से मुनाफा कमा रहे हैं।
पैक्स से बालोर के किसान सुखबीर, सांखोल के मंजीत, बराही के कूके और बामनोली के काला समेत शुक्रवार को सैकड़ों किसानों को बिना खाद लौटना पड़ा। बराही के दीपक ने बताया कि उन्हें डीएपी भी बाजार से ब्लैक में खरीदना पड़ा।
मेरी पांच एकड़ गेहूं की फसल को यूरिया की तुरंत जरूरत है। इसके लिए दस दिन से बहादुरगढ़ के चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन हर बार खाली लौटना पड़ता है। जल्द ही यूरिया नहीं मिला तो फसल खराब हो जाएगी।
चंदन सिंह, किसान
ठंड कम है।
मेरी फसल तत्काल कोरबा मांग रही है और कोरबे के बाद यूरिया का छिड़काव करने की सख्त जरूरत रहेगी। लेकिन पैक्स में खाद उपलब्ध नहीं है। तीन बार चक्कर लगाने के बावजूद खाली लौटना पड़ा।
-मनोज कुमार, किसान
क्या कहते हैं अधिकारी
किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन कुछ किसान एक ही बार में जरूरत से ज्यादा यूरिया ले जाते हैं, जिससे कुछ किसानों को मिल नहीं पाता। किसानों को चाहिए कि जरूरत के मुताबिक खरीदते रहें।
-डॉ. सुनील कौशिक, एसडीओ (फोटो फाइल नंबर 4)
कृषि विभाग, बहादुरगढ़