बहादुरगढ़। सुबह और रात को स्मॉग की चादर फैलने लगी है। आंखों में जलन और सांस के रोगियों की सांसें फूलने लगी हैं। सामान्यत: एक्यूआई 0 से 50 के बीच होना चाहिए, लेकिन यह 300 के पार पहुंच गया है जोकि सेहत के लिए खतरनाक है। लिहाज सावधान रहने की जरूरी है। इस मौसम में लापरवाही बरती गई तो बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।
नागरिक अस्पताल में प्रदूषण से परेशान मरीजों की संख्या बढ़ रही है। फिजिशयन डॉ. सुंदरम ने बताया कि स्मॉग से खांसी, गले और छाती में संक्रमण आदि से बीमारियां हो सकती हैं। जिन लोगों को अस्थमा है उनके लिए यह काफी खतरनाक है। ऐसे लोगों को स्मॉग के दौरान घर से बाहर निकलने से बचना चािहए।
यह साइनस और एलर्जी वाले मरीजों के लिए उत्प्रेरक का काम करती है। ये कण फेफड़े में चले जाते हैं। इसके लिए प्रदूषण काफी हद तक जिम्मेदार है। स्मॉग के कारण सांस लेने में दिक्कत होने पर कई तरह की परेशानियां होती हैं। बुखार होने का खतरा भी बना रहता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, सांस के मरीजों के लिए यह कण ज्यादा नुकसानदेह है।
नागरिक अस्पताल की नेत्र विशेषज्ञ डॉ. मालविका ने बताया कि ऐसे वातावरण में आंखों की नमी प्रभावित होने लगती है। इससे आंखों में चिकनाहट कम होने लगती है और सूखापन आने लगता है। आंखों से पानी आना, आंखें लाल होना, सूजन, जलन, खुजली होने लगती है। इससे बचने के लिए आंखों को कई बार धोएं व बाहर निकलते समय गॉगल्स लगाएं।
स्मॉग से होती हैं ये समस्याएं
आंखों में जलन, श्वास संबंधी परेशानियां, फेफड़ों में संक्रमण, घबराहट, सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, त्वचा संंबंधी बीमारियां।
सामान्य लोगों के लिए जारी की गई एडवाइजरी
- अपनी गतिविधियां सामान्य रखें जैसे दौड़ना या साइकिल चलाना, टहलना आदि कम करें, जिससे सांस की समस्याओं से राहत मिलेगी।
- सुबह और शाम के समय बाहरी गतिविधियां न करें।
- यदि इस दौरान आपको कफ, सीने में दबाव या घुटन, सांस लेने में कठिनाई या बेहोशी होती है तो गतिविधियां तुरंत बंद कर बैठ जाएं।
- घर से बाहर निकलें तो मुंह पर रूमाल या मास्क लगाएं
- पेय पदार्थ ज्यादा लें, खासकर गर्म पेय पदार्थ का सेवन करें।
- घरों की खिड़कियां दरवाजे बंद रखें।
- सांस के मरीज अपनी दवाएं समय से लें।
- कोई परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।