बहादुरगढ़। भगवान गजानन के जन्मदिन पर श्रीगणेश चतुर्थी पर्व 7 सितंबर को मनाया जाएगा। मूषक पर सवार गणपति रिद्धि-सिद्धि के साथ विराजेंगे। गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। गणेश चतुर्थी पर इस बार सर्वार्थ सिद्धि समेत चार योग रवि, ब्रह्म और इंद्र योग है। इस दिन घरों में गणेश जी को स्थापित किया जाता है और अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की धूमधाम से विदाई की जाती है। बप्पा को विराजने के लिए मूर्ति बनाने का काम तेजी से चल रहा है। कई संस्था और संगठन तैयारी में जुटे हैं।
महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा सहित देश के समस्त हिस्सों में यह पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। गणेश को बुद्धि, विवेक, धन धान्य, रिद्धि-सिद्धि का कारक माना जाता है। मान्यता है कि गणेश जी को प्रसन्न करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति की स्थापना होती है। गणेश जी को दूब घास (दूर्वा) प्रिय है। इसलिए दूब अर्पित करें, मोदक का भोग लगाएं, मोदक घर में बनाएं तो ज्यादा बेहतर होता है।
मिट्टी की लाल और पीले रंग की मूर्ति की स्थापना करना शुभ
कई बार लोग समझ नहीं पाते कि कैसी मूर्ति स्थापित होनी चाहिए। सबसे पहले ये समझ लेना जरूरी है कि मूर्ति मिट्टी की बनी हो। इसके विसर्जन के बाद प्रदूषण न फैलें। शास्त्रों में कहा गया है कि हर रंग की मूर्ति के पूजन का फल भी अलग होता है। पीले रंग और लाल रंग की मूर्ति की उपासना को शुभ माना गया है। पीले रंग की प्रतिमा की उपासना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
ऐसे करें पूजन
लालचंद कॉलोनी निवासी ज्योतिषाचार्य रमेश भगत ने बताया कि गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान ध्यान करके गणपति के व्रंत का संकल्प लें। इसके बाद दोपहर को गणपति की मूर्ति या फिर उनका चित्र लाल कपड़े के ऊपर रखें। फिर गंगाजल छिड़ने के बाद भगवान गणेश का आह्वान करें। मंत्रोच्चारण करें। इसके बाद गणेश जी को जल, अक्षत, दूर्वा घास, लड्डू, पान, धूप आदि अर्पित करें। इसके बाद गणेश जी के मंत्र ऊं गं गणपतये नम: का जप करें और घी का दीपक जलाएं।
यह बन रहे योग
सर्वार्थ सिद्धि योग : 7 सितंबर को दोपहर 12:34 बजे से 8 सितंबर को सुबह 6:03 बजे तक रहेगा।
रवि योग : गणेश चतुर्थी के दिन सुबह 6:02 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक।
ब्रह्म योग : चतुर्थी पर ब्रह्म योग सूर्योदय 6:02 बजे से रात 11:17 बजे तक।
इंद्र योग : गणेश चतुर्थी की रात 11:17 बजे से अगले दिन तक है।
गणेश चतुर्थी के लिए पूजा सामग्री
-गणेश मूर्ति, लकड़ी की चौकी, केले के पौधे मंडप बनाने के लिए
-पीला और लाल रंग का कपड़ा, नए वस्त्र, जनेऊ, पताका
-चंदन, दूर्वा, फूल, अक्षत, पान का पत्ता, सुपारी, मौसमी फल
-धूप, दीप, गंगाजल, कपूर, सिंदूर, कलश, मोदक, केला
-पंचामृत, पंचमेवा, मौली, आम और अशोक के पत्ते
-गणेश चालीसा और आरती, गणेश चतुर्थी व्रत कथा की पुस्तक