साल्हावास। झाड़ली स्थित एपीसीएल की ओर से बुधवार को ऑडिटोरियम में बायोमास को-फायरिंग विषय पर क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय मिशन समर्थ के सहयोग से आयोजित हुई। इसमें डीसी स्वप्निल रविंद्र पाटिल मुख्य अतिथि रहे। कार्यशाला का उद्देश्य हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करना तथा कच्चे बायोमास के संग्रहण, एकत्रीकरण और गुणवत्ता युक्त पैलेट निर्माण से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना रहा।
डीसी पाटिल ने एपीसीएल की ओर से प्रदूषण कम करने, हरित ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान देने, किसानों की आय बढ़ाने और शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि एपीसीएल की यह पहल एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
कार्यक्रम में समर्थ मिशन के प्रबंध निदेशक अनिल बावेजा, सीईओ दिलीप काइबोर्त्ता, उपनिदेशक मनोज कुमार यादव, एनटीपीसी दादरी के परियोजना प्रमुख चंद्रमौली कसिना, ओएंडएम जीएम जेकेडे, जीएम मोहम्मद निजामुद्दीन, एजीएम (एचआर) के. श्रीलता, झज्जर पावर लिमिटेड, अपूर्वा एनर्जी के अधिकारी तथा आसपास के गांवों के किसान उपस्थित रहे।
बायोमास उपयोग पर एपीसीएल को बधाई
भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अपर सचिव पीयूष सिंह ने एपीसीएल को अब तक 4.52 लाख मीट्रिक टन से अधिक बायोमास के उपयोग और राष्ट्रीय मानक स्थापित करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति एपीसीएल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। साथ ही पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में भी यह एक बड़ा कदम है।
एपीसीएल ने किसानों, उद्यमियों और स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ सक्रिय सहयोग कर बायोमास ईंधन की मांग बढ़ाई है। इस प्रयास से किसानों की आय में वृद्धि, रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिला है।