सुबह और रात को स्मॉग की चादर फैल रही है। आंखों में जलन और सांस के रोगियों की सांसें फूल रही हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक 0 से 50 के बीच संतोष जनक माना जाता है। पिछले 10 दिनों से 300 से अधिक चल रहा है। इससे लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी हो रही है।
अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय गोयल ने बताया कि बच्चों पर प्रदूषण का असर व्यस्कों से ज्यादा होता है, क्योंकि 8 साल की उम्र तक के बच्चे के फेफड़े का विकास हो रहा होता है। फेफड़ों के अलावा बच्चों के दिल पर भी प्रदूषण का असर पड़ता है, जिससे वे हाइपरटेंशन का शिकार हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं के प्रदूषण के संपर्क में आने से भी गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर पड़ता है। वहीं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मालविका ने बताया कि प्रदूषण के कारण लोगों की आंखों में जलन, लाल होना समेत अन्य बीमारी हो रही है। प्रदूषण से आंखों को बचाने के लिए दुपहिया वाहन चालक को चश्मे का प्रयोग करना चाहिए। ताकि हवा सीधी आंखों पर न लगे।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय गोयल बोले, ये करें उपाय
-घर के अंदर वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
-घर में अगरबत्ती, धूपबत्ती, कोयला वगैरह न जलाएं।
-घर के अंदर या बच्चों के पास धूम्रपान न करें।
-घर में पेंट, सॉल्वेंट्स या वार्निश का इस्तेमाल न करें, जिनसे धुआं निकलता हो।
-बच्चों को सिखाएं कि बाहर जाने के बाद हाथ और चेहरा अच्छी तरह से धोएं।
-बच्चों को संतुलित आहार खिलाएं, जिसमें विटामिन सी और विटामिन ई जैसे एंटीऑक्सीडेंट भरपूर हो।
-अपने बच्चे की बाल रोग विशेषज्ञ से नियमित जांच कराएं।
-जब तक प्रदूषण का स्तर नीचे नहीं आता, तब तक खुले में कम से कम निकलें और पानी पीते रहें।
बच्चों में ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर के पास जाएं
-लगातार खांसी
-सांस लेने में दिक्कत
-नाक, गले और आंख में दर्द
-आंखों में जलन और उनका लाल होना
-बार-बार छींक आना
-लगातार नाक में पानी आना
22jjrp21- बहादुरगढ़। शहर में झज्जर मोड़ पर सड़क पर कहीं नहीं लगाए गए हैं रिफलेक्टर। संवाद
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