किसानों के अलावा सेवानिवृत्त सेना कर्मी, शिक्षक, छात्र, मजदूर और प्राइवेट नौकरी करने वाले लोग भी बड़ी संख्या में मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा निकाले जाने वाली ट्रैक्टर परेड में शामिल होने के लिए सोमवार को टीकरी बार्डर पहुंचे। ट्रैक्टर मार्च में शामिल होने आए लोगों ने दावा किया कि तीन कृषि कानून न केवल किसानों के विरोधी हैं, बल्कि आम लोगों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे।
काफी संख्या में साथी पूर्व सैनिकों के साथ लुधियाना से आए पूर्व सैनिक हरदेव सिंह ने कहा कि किसान उचित मांग के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। हम यहां किसानों की ट्रैक्टर परेड को सफल बनाने के लिए आए हैं। सेवा के दौरान, हमने राष्ट्र की रक्षा के लिए सीमा पर काम किया। अब हम कृषि की रक्षा के लिए किसानों के साथ खड़े है, जो पंजाब और पूरे देश की रीढ़ हैं। सिरसा के रोड़ी से पंजाब के कर्मचारी रणबीर सिंह, विनोद, सतिंदर और गुरदेव सिंह अपने साथी देवा के ट्रैक्टर से आंदोलन में भाग लेने आए हैं।
ट्रैक्टर परेड में शामिल होने के लिए दो दिन की छुट्टी लेकर मोगा के स्कूल अध्यापक धर्मेंद्र सिंह टीकरी पहुंचे। उन्होंने कहा, हालांकि मैं टीचर हूं, मेरे पूर्वज खेती से जुड़े थे, इसलिए मैं तीनों कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसानों का दर्द जानता हूं और महसूस करता हूं। वे अपनी और आने वाली पीढ़ी की रक्षा के लिए इस हाड़ कंपा देने वाली ठंड से जूझ रहे हैं। मैं और मेरे सहयोगी पूरी तरह से आंदोलन का समर्थन करते हैं।
पंजाब से आए खेत मजदूर सगईद सिंह ने कहा कि अगर कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया गया तो भविष्य में किसानों को होने वाले नुकसान को वह जानते हुए भी नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा, मैं यहां किसानों की आवाज बनने के लिए आया हूं। मोगा के भवन निर्माण ठेकेदार हरदेव सिंह ने कहा कि यह केवल किसानों की लड़ाई नहीं है, बल्कि सभी वर्गों के लोग इसमें शामिल हैं। उन्होंने कहा, यह हर पंजाबी की जिम्मेदारी है कि कोई अन्नदाता बर्बाद न हो। यह लड़ाई हम अपने बचाव के लिए लड़ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर निवासी रामकृष्ण मिश्र अपने रिश्तेदार भोलानाथ के साथ टीकरी बॉर्डर सभा में बैठे। मिश्र ने कहा कि इन कृषि कानूनों से हम किसानों की गर्दन पूंजीपतियों के हाथ में चली जाएगी। किसानों की कमर टूट गई तो मजदूरों की स्थिति की कल्पना ही नहीं की जा सकती है, इसलिए केवल पंजाब ही नहीं देश के हर क्षेत्र के लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि किसी न किसी तरह इन कानूनों को वापस करवाएं।