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Jhajjar-Bahadurgarh News: दादा की छांव में अमित ने लहराया परचम, जीता स्वर्ण

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सीनियर एशियन चैंपियनशिप में अमन सहरावत ने जीता स्वर्ण पदक जीतने के बाद खुशी व्यक्त करते हुए। सं
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नरेश दहिया
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साल्हावास। कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित फ्री स्टाइल कुश्ती प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अमन सहरावत ने स्वर्ण पदक प्राप्त कर भारत का नाम रोशन किया है। मार्च में कुश्ती संघ की ओर ओवरसाइट कमेटी ने एशियन चैंपियनशिप के लिए ट्रायल लेकर भारतीय दल के 30 पहलवानों का चयन किया था, जिसमें से 24 पहलवान हरियाणा के हैं। जिले के बिरोहड़ निवासी 19 वर्षीय अमन सहरावत ने 57 किलो भार वर्ग में सीनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक प्राप्त कर विदेशी धरती पर तिरंगा लहराते हुए अपनी खुशी का इजहार किया। उन्होंने अपने विरोधी पहलवान कजाकिस्तान के अल्मोज स्मानबेकोव को पराजित किया है। अमन सहरावत के भाई चौधरी राकेश सहरावत ने बताया कि वह तीन बार भारत कुमार रह चुके हैं। अमन सहरावत का जीवन संघर्षपूर्ण रहा है। प्राथमिक स्तर की शिक्षा कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूल बिरड़ से प्राप्त की। आठ वर्षीय अमन को जब परिजनों ने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में भेजने की योजना बनाई तब दिल्ली जाने से छह महीने पूर्व उनकी माता का निधन हो गया और दिल्ली जाने कि छह महीने बाद उनके पिता का निधन हो गया था। वह फिलहाल छत्रसाल स्टेडियम दिल्ली में सतपाल महाबली पहलवान से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। वर्तमान में रेलवे विभाग में यात्रा टिकट परीक्षक के पद पर कार्यरत हैं ।
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चाचा, ताऊ व दादा ने की परवरिश
अमन सहरावत का परिवार साधारण है वह किसान परिवार से संबंध रखते हैं। उनके हिस्से में केवल ढाई एकड़ जमीन आती है। माता-पिता के निधन के बाद अमन सहरावत की परवरिश उनके चाचा, ताऊ व दादा ने मिलकर की। अमन सहरावत की बहन पूजा 12वीं कक्षा में पढ़ रही हैं। अमन की पिता सोमबीर सहरावत व मां कमलेश का का 11 साल पहले निधन हो चुका है। वर्तमान में अमन के दादा मांगेराम, उनके ताऊ सुधीर, जयवीर और चाचा रणवीर, कर्मवीर, वेद प्रकाश आदि परिजन गांव से दो किलोमीटर दूर नौगांव की तरफ जाने वाले कच्चे रास्ते पर बनी छोटी सी ढाणी में रहते हैं। वह वर्तमान में रेलवे विभाग में यात्रा टिकट परीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। बिरोहड़ के गादणी आश्रम से की कुश्ती की शुरुआत अमन ने गांव बिरोहड़ स्थित गाधणी आश्रम में बने छोटे से अखाड़े में कुश्ती की शुरुआत की थी। उनके भाई राकेश ने बताया कि उनके परिजनों में चाचा ताऊ और वे सभी भाई कुश्ती के खेलने के शौकीन रहे हैं। अमन भी बचपन से ही कुश्ती का शौकीन रहा है। उन्होंने गांव के ही गाधणी आश्रम से कुश्ती की शुरुआत की थी।
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