किसी हादसे या फिर बीमारी के वक्त एंबुलेंस न मिले तो मरीज की जान हलक में अटकना स्वाभाविक है। गत 23 अक्तूबर को प्रसव पीड़ा से कराह रही पूनम को पीजीआई के लिए एंबुलेंस नहीं मिली, तो उसने ऑटो स्टैंड पर खुले मे ही बच्चे को जन्म दिया, जिसकी मौत हो गई।
मरीजों को इस स्थिति का सामना इसलिए करना पड़ रहा है, क्योंकि सिविल अस्पताल की एंबुलेंस सेवा ही बीमार है। कुल 6 एंबुलेंस हैं, जिनमें से 3 पिछले काफी समय से खराब है।
तीन से ही काम चलाना पड़ रहा है और वह अधिकतर समय ऑन रोड ही रहती हैं। सबसे बुरे हालात छारा सीएचसी के हैं, जहां एक भी एंबुलेंस नहीं है। व्यवस्था सुधार के सवाल पर चिकित्सा अधिकारी एक दो दिन में एक नई एंबुलेंस मिलने की बात कहते हैं।
64 हजार की आबादी पर मात्र एक एंबुलेंस
वर्ष 2011 की जनगणना में झज्जर जिले की जनसंख्या 9 लाख 58 हजार 405 है। बात स्वास्थ्य सेवाओं में अहम माने जाने वाल एंबुलेंस सेवा की करें तो पूरे जिले में 18 एंबुलेंस हैं।
वर्तमान में इनमें से 3 काफी समय से खराब खड़ी हैं। जो 15 एंबुलेंस चल रही हैं, उनमें झज्जर सिविल अस्पताल में अब सिर्फ 3, बहादुरगढ़ सिविल अस्पताल में 3 और बेरी सिविल अस्पताल में 1 एंबुलेंस हैं। जिले में 6 सीएचसी हैं, इनमें छारा सीएचसी को छोड़कर अन्य पांच के पास एक-एक एंबुलेंस हैं।
आंकड़े पर गौर करें तो 64 हजार लोगों के लिए मात्र एक एंबुलेंस है। ऐसे में इमरजेंसी में किसी मरीज को अस्पताल लाना है या फिर रेफर की स्थिति में पीजीआई ले जाना है, संबंधित को आमतौर किसी प्राइवेट एंबुलेंस या फिर गाड़ी पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
...ऐसे में छारा से कैसे आए मरीज
एंबुलेंस सुविधा के मामले में छारा गांव की सीएचसी की हालत सबसे खस्ता है। असल में यहां कोई भी एंबुलेंस नहीं है। यह सीएचसी झज्जर से जहां 18 किलोमीटर दूर पड़ती है।
वहीं बहादुरगढ़ से दूरी 22 किलोमीटर है। यहां से इमरजेंसी में किसी प्रसूता या फिर अन्य मरीज को बड़े अस्पताल में लाना हो तो मरीजों की जान हलक में अटक जाती है। अन्य सीएचसी ढ़ाकला, बादली, दुबलधन, जामनगर व डीघल में 1-1 एंबुलेंस है, लेकिन एक मरीज को ले जाने के बाद अन्य मरीजों की हालत रामभरोसे हो जाती है।
प्राइवेट के लिए बैन
स्वास्थ्य विभाग में 3 एंबुलेंस खराब है। हम 15 एंबुलेंस से बेहतर तरीके से काम चला रहे हैं। एक नई एंबुलेंस आने वाली है। ऐसा कभी कभार ही होता है कि सिविल अस्पताल की तीनों एंबुलेंस ऑन रोड हों। प्राइवेट अस्पताल के लिए सरकारी एंबुलेंस नहीं दी जाती। -डॉ. एनके गर्ग, मेडिकल सुपरिटेंडेंट