शहर में पीने के लिए सप्लाई होने वाला पानी सेहत बिगाड़ सकता है। सुनने में अटपटा लगेगा, लेकिन हकीकत यही है कि शहर के तमाम वाटर टैंक गंदगी से अटे पड़े हैं।
लघु सचिवालय के सामने वाले वाटर टैंक में तो पिछले काफी समय से एक पशु का शव पड़ा है। ऐसे में यहां का पानी न केवल बीमार कर सकता है, बल्कि जिंदगी के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।
शहर में छावनी मोहल्ला, लघु सचिवालय के सामने, मेन तहसील रोड व छारा रोड पर चार जगह वाटर टैंक हैं। इनमें से एक भी वाटर टैंक ऐसा नहीं है, जिसे कि स्वच्छ कहा जा सके।
विडंबना यह है कि स्वच्छता अभियान का दावा करने वाला प्रशासन भी इस ओर लापरवाही बरत रहा है। लोग शिकायत करके थक चुके हैं,
लेकिन वाटर टैंकों की सफाई कराना तो दूर, यहां का दौरा करना भी प्रशासनिक अधिकारी गवारा नहीं समझ रहे। अमर उजाला की टीम ने जब शहर के वाटर टैंकों का दौरा किया तो कुछ इस तरह की हकीकत सामने आई।
शहर में रणिया वाले टैंक में काई जमी मिली। इस टैंक की हालत बयां कर रही थी कि यहां काफी अर्से से सफाई नहीं हुई। पूरे वाटर टैंक में गंदगी जमा थी।
बच्चे यहां मछली पकड़ने में व्यस्त नजर आए। गुड़गांव रोड के वाटर टैंक में तो एक पशु का शव पड़ा मिला। यहां वाटर वर्क्स पर कोई कर्मचारी भी नहीं मिला, जिससे इस बारे में पूछा जा सकता।
पुराना तहसील रोड पर बने मेन वाटर वर्क्स में दो वाटर टैंक हैं। इनमें से एक टैंक जहां पूरी तरह सूख पड़ा मिला तो वहीं दूसरे टैंक में नाममात्र का पानी था।
यहां भी पानी में काई और गंदगी नजर आई। छारा रोड स्थित चौथे वाटर टैंक में भी सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली।
बीमारियों के साथ जान का खतरा
गंदा पानी केवल बीमार ही नहीं करता, बल्कि इसकी वजह से जान पर भी खतरा बन जाता है। एडवांटा अस्पताल के चिकित्सक डॉ. बलवंत सिंह ने बताया कि गंदा पानी पीने के कारण पेट में कीड़े, उलटी, दस्त, गैस, पीलिया, कमजोरी और टाइफाइड जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
अगर वाटर टैंक में जानवर मृत पड़ा है, तो इसके पानी की सप्लाई तुरंत रोकी जानी चाहिए। ऐसा पानी पीने से वाटर प्वाइजनिंग हो सकती है। इस पानी को पीने से जान को भी खतरा हो सकता है।
शहर के वाटर टैंकों की नियमित रूप से सफाई कराई जाती है। कुछ वाटर टैंकों में नीचे से घास उगी है, जिसके कारण गंदगी नजर आती है।
वाटर टैंक में मरा हुआ जानवर पड़ा होने की जानकारी मुझे नहीं है। वाटर टैंक में जानवर पड़ा होने की बात पर यकीन करना मुश्किल हो रहा है।
मैने तीन-चार दिन पहले स्वयं वहां का दौरा कर जांच की थी। उस समय सब ठीक था। फिर भी, दोबारा से मौके पर जाएंगे और जो भी समस्याएं मिलीं, उन्हें दूर किया जाएगा।
सतीश राठी, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग