बहादुरगढ़। दो दिनों से प्रदूषण के स्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। यह कभी कम तो कभी बढ़ रहा है। हवा ने प्रदूषण के स्तर को कुछ कम किया है, लेकिन शहरवासियों को अभी ज्यादा राहत नहीं मिल पा रही है। सुबह के समय छाया रहने वाला स्मॉग अधिक मुसीबत बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार लोगों को 9 नवंबर तक प्रदूषण से राहत मिलेगी। इसके बाद फिर कोहरा और स्मॉग बढ़ने के आसार हैं। प्रदूषण का स्तर न बढ़े, इसको लेकर नगर परिषद शहर की सड़कों पर लगातार टैंकरों के जरिये पानी का छिड़काव करवा रहा है।
वीरवार को बहादुरगढ़ में एक्यूआई सुबह 246 और शाम को 224 दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक्यूआई दो दिनों तक इसी स्तर बना रहेगा। इसके बाद इसके फिर से बढ़ने की आशंका है। संभावना जताई जा रही है कि छठ पर्व के समापन पर आतिशबाजी होगी और एक बार फिर प्रदूषण का असर देखने को मिलेगा। अभी चिकित्सक लोगों को इस मौसम में प्रदूषण से बचने की सलाह दे रहे हैं।
प्रदूषण पहुंचाता है नुकसान
पीएम10 : यह दस माइक्रोमीटर साइज तक के कण हैं। जब इनका स्तर अधिक हो जाता है तो इनकी वजह से लोगों को एलर्जी, सिरदर्द, सांस लेने में परेशानी, अस्थमा, आंखों में जलन, सूजन जैसी समस्याएं होती हैं। आमतौर पर सांस के साथ नाक इन्हें अंदर जाने से रोक लेती है।
पीएम 2.5 : 2.5 माइक्रोमीटर साइज तक के ये कण सांस के साथ शरीर में चले जाते हैं और अंगों को प्रभावित करते हैं। इससे जकड़न, चक्कर आना, थकावट, चिड़चिड़ापन जैसी समस्या भी हो सकती है। इससे बच्चों का विकास प्रभावित होता है।
एसओ 2 : हवा में सल्फर डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ने से फेफड़ों का फंक्शन प्रभावित हो सकता है। आंखों में जलने और लाली के साथ कफ होने का खतरा रहता है। अस्थमा का खतरा भी बढ़ जाता है।
एनओ2 : यह गाड़ियों और इंडस्ट्रियों के धुएं से निकलता है। इसकी वजह से व्यक्ति के दिल पर असर होता है। बच्चों के फेफड़े कम काम करने लगते हैं, सांस संबंधित समस्या होती है।
एनएच3 : आम बोलचाल में इसे अमोनिया कहा जाता है। इसका स्तर हवा में बढ़ने से व्यक्ति को आंखों व गले में जलन का अहसास होता है। गले के अंदरुनी हिस्से में सूजन की समस्या हो सकती है। सांस की नली में सूजन आ सकती है।
ओजोन : ओजोन का स्तर बढ़ने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इनमें छाती का दर्द, कफ, गले में खराश, छाती में जकड़न जैसी समस्या शामिल हैं।
सीओ : हवा में इस जहरीली गैस का स्तर बढ़ने से व्यक्ति को सिरदर्द, बेहोशी, कमजोरी, पेट से जुड़ी समस्या, उल्टी, छाती दर्द और भ्रम की समस्या भी हो सकती है।
-डॉ. सुंदरम, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल बहादुरगढ़।