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दो दिन बाद भी दहक रही हैं शहर की दुकानें

Tue, 23 Feb 2016 01:29 AM IST
ब्ययूराो/अमर उजाला /झज्जर
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अंबेडकर चौक से छिक्कारा चौक का क्षेत्र शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों में से एक है। आम दिनों में यहां सुबह से शाम तक चहल-पहल रहती थी, वहीं अब सन्नाटा पसरा है। यह सब हुआ है पिछले तीन दिनों में उपद्रवियों द्वारा की गई तोड़फोड़ के कारण। हालांकि अब यह क्षेत्र पूरी तरह से सेना के कब्जे में हैं। बीस फरवरी को हुए उपद्रव के बाद यहां का पूरा मंजर झकझोर देने वाला है। आगजनी का शिकार हुई दुकानों व बड़े शोरूमों से सोमवार को तीसरे दिन भी धुएं के गुबार निकल रहे हैं। शहर के जिस क्षेत्र में सबसे ज्यादा उपद्रव हुआ, वह यही क्षेत्र है जो अब सेना के कब्जे में है। आमजन की आवाजाही पर यहां रोक है। इसके चलते उपद्रव का शिकार बनी दुकानों व संस्थानों के मालिक नुकसान का आंकलन तक करने यहां नहीं आ पा रहे हैं।20 फरवरी को जाट आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से भड़के युवाओं के बीच मौजूद असामाजिक तत्वों ने गुंडागर्दी की, उसके जख्म अब भी हरे हैं। सोमवार को क्षेत्र में हालात सामान्य हुए तो बर्बादी का भयावह मंजर भी सामने आ गया। अंबेडकर चौक से छिक्कारा चौक तक करीब 150 मीटर के क्षेत्र में उपद्रवियों ने 20 दुकानों को जला डाला। इनमें दो बैंक और इनके एटीएम भी शामिल हैं। बस स्टैंड के ठीक सामने बने कपड़े के शोरूम से अभी भी धुआं निकल रहा है। बस स्टैंड भी तबाही की तस्वीर बखूबी बयां कर रहा है। बस स्टैंड सुनसान पड़ा है। इक्का-दुक्का कर्मचारी दिखाई दिए।   इस क्षेत्र में रेस्टोरेंट के अलावा, बैंक, कपड़े की दुकानें, जूतों की दुकानें, इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानें, मिष्ठान भंडार, शोरूम व अन्य प्रकार के सामानों की दुकानों को उपद्रवियों ने निशाना बनाया। बस स्टैंड के सामने बने गॉरमेंट्स शोरूम की दीवार अब गिरने लगी है, वहीं छत का लेंटर भी झुक गया है। छावनी मोहल्ले में भी 16 दुकानों को जलाया गया है।  हर तरफ सेना का ही पहराशहर में चारों ओर सेना का पहरा होने के कारण लोग घरों में कैद हो गए हैं। थोड़ी सी आहट पाते ही लोग चौंक जाते हैं। कोई खिड़की से बाहर झांकता है तो छत से जाकर ताजा जानकारी लेता है। लोग इतने डरे सहमे हैं कि घर का दरवाजा तक ठीक से नहीं खोल रहे हैं। बाजार में हर तरफ सेना के जवान ही दिखाई दे रहे हैं। लोग खुलकर बोल रहे हैं, लेकिन यहां दिनभर शोर-शराबे व दुकानदार व ग्राहक के बीच मोल भाव से होने वाली बातचीत की रौनक अब गायब है। अक्सर आबाद रहने वाली गलियां अब सूनी हैं।
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