बादली। जहांगीरपुर गांव में गरीब परिवारों को दिए जा रहे मुफ्त प्लाट का मामला सीएम दरबार पहुंच गया है। दरअसल मुफ्त प्लाट से वंचित परिवार के लोगों का कहना है कि ग्राम पंचायत और सचिव ने गलत तरीके से सर्वे करा कर अपात्र लोगों को प्लॉट आवंटित सूची में शामिल किया है, जबकि पात्र परिवारों का सर्वे ही नहीं करवाया गया।
इतना ही नहीं ग्राम पंचायत में पंच और उनके परिवार के लोगों का नाम मुफ्त प्लॉट मिलने वाली सूची में शामिल किया गया है। इसको लेकर सैकड़ों परिवारों ने अतिरिक्त जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा है और सीएम विंडो पर दोबारा सर्वे करवाने की मांग की है। ज्ञापन सौंपने वाले ग्रामीणों ने बताया कि कुछ ऐसे परिवारों को प्लॉट दिए गए हैं, जिन्होंने पहले भी मुफ्त प्लाट लेने का लाभ लिया है।
पहले मिले प्लॉट को बेचकर अब दोबारा से सूची में उनका नाम शामिल कर दिया गया है। ग्रामीण अजय, जरीना, आशु, अंजू, हरिओम, देवकी निक्की, हरदेव, मनोज और रमेश सहित काफी संख्या में ग्रामीणों का कहना है कि गांव में दोबारा से सर्वे करा कर सूची जारी की जाए ताकि पात्र लोगों को प्लॉट से वंचित न रखा जा सके।
वहीं ग्राम सचिव विकास कुमार का कहना है कि सर्वे के आधार पर सूची बनाई गई है। ग्रामीणों के आरोप निराधार है। सूची में परिवार पहचान पत्र और सर्वे रिपोर्ट को प्राथमिकता दी गई है। इसके बाद भी खामियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
778 ने किया था आवेदन
जहांगीरपुर गांव से 778 परिवारों ने मुफ्त प्लाट लेने के लिए आवेदन किया था। पंचायती विभाग की तरफ से सर्वे करवाए जाने पर 208 परिवार ऐसे मिले जो गांव में नहीं रहते। गांव से बाहर रहने पर सूची से बाहर कर दिया गया जबकि 570 परिवारों का सर्वे किया गया। जिनमें 106 परिवारों को मुफ्त प्लाट देने की सूची में शामिल किया गया है।
सीईओ ने बनाई जांच कमेटी
ग्रामीणों की ओर से नई सूची पर आपत्ति दर्ज करवाए जाने के बाद सीईओ की तरफ से जांच कमेटी बनाई गई है जिसने सोमवार दोपहर बाद ही गांव में पहुंचकर दोबारा से सर्वे शुरू कर दिया है। जांच कमेटी में विभाग के एसडीओ, जेई, ग्राम सचिव और सीईओ कार्यालय से एक अधिकारी को शामिल किया गया है।