झज्जर। डीसी स्वप्निल रविंद्र पाटिल ने बताया कि हरियाणा सरकार की ओर से जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए कड़े प्रावधानों बनाए गए हैं। इन नियमों का उल्लंघन करते हुए बिना अनुमति के ट्यूबवेलों के माध्यम से भूजल का अवैध दोहन करने वाली औद्योगिक इकाइयां और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि संबंधित उद्योग एनओसी प्राप्त करें, अन्यथा कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण अधिनियम, 2020 का उद्देश्य प्रदेश में भूजल और सतही जल के संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन को सुनिश्चित करना है। इसके तहत प्राधिकरण ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके अनुसार राज्य में जो भी उद्योग या परियोजना भूजल निकाल रही है या निकालने का प्रस्ताव रखती है, उन्हें अनिवार्य रूप से अपनी बोरवेल को प्राधिकरण के पोर्टल पर पंजीकृत कराना और अनुमति प्राप्त करनी होगी।
डीसी ने स्पष्ट किया है कि एचडब्ल्यूआरए के प्रावधानों के तहत जिन परियोजनाओं ने अनुमति नहीं ली है, वे अवैध रूप से भूजल का दोहन कर रही हैं। ऐसे मामलों में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति और बोरवेल की सीलिंग जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा भी इन मामलों को गंभीर मानते हुए निर्देश दिए हैं कि अवैध भूजल निकासी करने वालों पर कार्रवाई की जाए।