रिपोर्ट के बाद पता चल पाएगा कि आखिर पशुधन की हानि किस कारण हो रही है। ग्रामीणों ने पंचायत में बताया कि अब तक गांव के 16 से अधिक पशुपालकों के करीब 20 दुधारू पशुओं की मौत हो चुकी है। 70 से 80 प्रतिशत पशुपालन पर टिकी गांव की अर्थव्यवस्था पशुधन नुकसान से डगमगा गई है।
पशु पालकों को बताए उपाय
वहीं डॉक्टर टीम ने पशु पालकों से अनुरोध किया कि पशुओं का बीमा अवश्य करवाना चाहिए और इसके साथ-साथ मुंह खुरी के इंजेक्शन जरूर लगवाएं। लाल दवाई, फिटकरी से थान में छिड़काव करें और पशुओं के खुरों को लाल दवाई से धोएं, पशुओं के मुंह पर भी लाल दवाई के छिटें लगाएं। ग्रामीणों ने सर्व सम्मति से हवन यज्ञ करवाने की बात भी पंचायत में कही, जिसका सभी ने समर्थन किया है। इस दौरान पार्षद प्रतिनिधि अनिल पहलवान, लीलू पहलवान, पुंडरी, श्रीभगवान, मंजीत जाखड़, राजल नौगांव, जयप्रकाश सहरावत उपस्थित रहे।
प्रशासन से मुआवजे की लगाई गुहार
ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि मृत पशुओं के लिए उचित मुआवजा दिया जाए। पशुपालकों का कहना है कि यदि समय रहते सहायता नहीं मिली तो गांव के कई परिवार कर्ज के बोझ नीचे दब जाएगें। साथ ही विधायक गीता भुक्कल व जिला परिषद चैयरमेन कप्तान बिरधाना से भी प्रधानमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता दिलवाने के लिए सहयोग की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि वह जल्द ही इस मामले में डीसी से मिलेंगे और जिन लोगों के पशुधन का नुकसान हुआ है उनके मालिकों को आर्थिक सहायता देने के लिए गुहार लगाएंगे।
इन पशुपालकों को पशुधन का हुआ नुकसान
-श्रीभगवान पुत्र छोटू - एक भैंस व एक काटडा
-प्रविंद्र पुत्र आशाराम - एक भैंस
-मंजीत पुत्र राजल - एक भैंस
-मीनू पुत्र सुरजभान - एक भैंस
-मुकेश पुत्र दयानंद - एक भैंस
-धर्मेन्द्र पुत्र आजाद - दो भैंस
-धर्मवीर पुत्र किशन - एक भैंस
-सतबीर - एक भैंस
-धर्मवीर रामचंद्र - एक भैंस
-धोला पुत्र धर्मपाल - दो भैंस
-धर्मपाल पंडित - एक भैंस
-राजे - एक भैंस
-रमलू - एक भैंस
-राजपाल - एक भैंस
-जोगेंद्र - दो भैंस
-रामवीर पुत्र बलवान - एक भैंस