अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
डीघल गांव के ग्रामीण जलभराव की समस्या से काफी परेशान हैं। गांव के बीच छह स्थानों पर जलभराव है। 1995 में आई बाढ़ के बाद से दिक्कत इतनी बढ़ गई थी कि यहां 23 वर्षों में पानी कभी नहीं सूखा। सैकड़ों ऐसे लोग हैं, जिन्होंने 23 साल से अपने प्लॉट की जमीन तक नहीं देखी। कारण एक ही था कि गांव में बरसाती पानी और गंदा पानी इस जगह पर आकर जमा हो जाता है। इसके चलते कई लोग अपने ही प्लॉट में निवास के लिए मकान तक नहीं बना पा रहे थे। वहीं, गांव के आस-पास के खेतों में जलभराव की वजह से खेती भी नहीं हो पा रही थी। इस समस्या को लेकर गांव के लोग अनेक बार अधिकारियों से भी मिले। लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। वहीं, गांव के जिला पार्षद प्रदीप अहलावत ने गांव की इस मूल समस्या को खत्म करने का बीड़ा उठाया। जिसका परिणाम यह है कि अब गांव के अधिकतर स्थानों से जल निकासी हो चुकी है।
इस तरह चलाया अभियान
पार्षद ने शुरूआती चरण में खुद के खर्चे पर ही इंजन और मोटर की सहायता से पानी निकासी शुरू करवाई। इसके बाद ये इरिगेशन विभाग के मुख्यालय चंडीगढ़ में चीफ इंजीनियर सतबीर कादियान से मिले। जहां पर इन्होंने गांव की समस्या बताई तो चीफ इंजीनियर ने विभाग की ओर से इन्हें मोटर व इंजन उपलब्ध करवाए। इसके बाद एसडीएम से समस्या को लेकर मिले तो उन्होंने निकासी के लिए पंपसेट उपलब्ध करवाए।
भत्ते से फूंक रहे डीजल
डीघल गांव के जोहड़ों की पानी निकासी करवाने के लिए इस समय 10 इंजन दिन-रात चल रहे हैं। जिनके डीजल का खर्च पार्षद अपने भत्ते से चला रहे हैं। वहीं गांव के कुछ युवकों को भी उक्त इंजनों की देखभाल के लिए लगाया है। इसके चलते अब गांव में हालात ये हो गए हैं कि जिन लोगों ने 23 सालों से अपने प्लॉट नहीं देखे थे, वो अब आशियाना बनाने का सपना देखने लगे हैं।
अब अनाज मंडी और मॉडल स्कूल के लिए उठेगी आवाज
पार्षद प्रदीप अहलावत के अनुसार जिन दो स्थानों पर जलभराव के कारण तालाब जैसे हालात बने हुए थे, उन पर अनाज मंडी व मॉडल स्कूल बनाने की घोषणा कांग्रेस सरकार के शासनकाल में हुई थी, लेकिन उस पर कोई कार्य नहीं हुआ। अब इन स्थानों के हालात में सुधार लगातार बरकरार रहे, इसके लिए वे अब सरकार से अनाज मंडी व मॉडल स्कूल बनवाने के लिए प्रयास करेंगे।