चिकित्सकों और संसाधनों की कमी से पंगु बनीं स्वास्थ्य सेवाएं
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
दादरी जिले में स्वास्थ्य सेवाएं इस समय चिकित्सकों, संसाधनों व स्टाफ की कमी के चलते पंगु बनी हुई है। जिला मुख्यालय अस्पताल से लेकर पीएचसी तक स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ रही है। जिला बनने के बाद भी अब तक सीएमओ का पद स्वीकृत नहीं हुआ है। सभी सीएचसी व शहर के मातृ-शिशु अस्पताल में एसएमओ तक के पद खाली हैं। इस समय जिला मुख्यालय स्थित 100 बेड के ऊधम सिंह सिविल अस्पताल और 30 बेड के मातृ-शिशु अस्पताल में सर्जन, चिकित्सक, रोग स्पेशलिस्ट, स्टाफ नर्सों, एंबुलेंस, दवाओं, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी चल रही है। आलम यह है कि 100 बेड के सिविल अस्पताल का दारोमदार 50 बेड के मुताबिक भी अधूरे पड़े स्टाफ के कंधों पर आ गया है।
अमर उजाला टीम ने जिले के अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति का शुक्रवार को ग्राउंड लेवल पर जायजा लिया तो हालात चौंकाने वाले मिले। जिला मुख्यालय पर तैनात चिकित्सकों में से 50 फीसदी चिकित्सक ठीक नौ बजे अपने कक्ष में उपस्थित नहीं मिले। वहीं, वेटिंग हॉल में बैठकर मरीज चिकित्सकों का इंतजार करते नजर आए। करीब नौ बजकर 25 मिनट पर मरीजों को उपचार मिलना शुरू हुआ। जब गोपी, बौंदकलां, झोझूकलां व 30 बैड के मातृ-शिशु अस्पताल में स्वीकृत पदों का स्थिति जांची तो चिकित्सकों सहित एलटी, फोर्थ क्लास कर्मचारियों, स्टाफ नर्सों, एलएमओ, सॉनोलोजिस्ट व रेडियोग्राफर की कमी की बात सामने आई।
100 बेड के अस्पताल की सेवाएं नाकाफी
लोहारू चौक समीप स्थित 100 बेड के सिविल अस्पताल में इस समय जो चिकित्सा सेवाएं हैं वो नाकाफी हैं। इस समय यहां एसएमओ और चार अन्य चिकित्सक ही तैनात हैं जबकि नियमानुसार यहां 22 चिकित्सकों की तैनाती की जरूरत है। इसके अलावा यहां एक्स-रे मशीन खराब पड़ी है और रेडियोग्राफर को डेपुटेशन पर भिवानी भेजा गया है। सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन तो है लेकिन सॉनोलोजिस्ट नहीं होने से पूरे सप्ताह मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा महज दो फोर्थ क्लास कर्मचारी ही यहां तैनात हैं जबकि जरूरत करीब 35 कर्मचारियों की हैं। एसएमओ अनीता गुलिया सर्जन भी हैं लेकिन सामान्य डिलीवरी ही यहां कराई जाती हैं।
हड्डी टूटने पर मरीज को कर देते हैं रेफर
भले ही चरखी दादरी जिला बन चुका हो लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं में कोई खास सुधार नजर नहीं आया है। जिला मुख्यालय में आर्थो स्पेेलिस्ट तो है लेकिन संसाधनों की भारी कमी है। सिविल अस्पताल में एक्स-रे मशीन छह माह से खराब पड़ी है और मरीजों को निजी लैब पर एक्स-रे कराने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद अंगुली की हड्डी टूटने पर भी मरीज को यहां से भिवानी या रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया जाता है।
सरकार ने नहीं की पेमेंट, अभी तक ठीक होकर वापस नहीं आई एंबुलेंस
जिला मुख्यालय अस्पताल की बड़ी एंबुलेंस खराब हो गई थी। इसे ठीक कराने के लिए गुरूग्राम भेजा गया था। विभागीय सूत्रों की मानें तो एंबुलेंस तो ठीक हो चुकी है लेकिन इसका बिल अभी तक सरकार ने चुकता नहीं किया है। इस कारण एंबुलेंस अभी तक अस्पताल वापिस नहीं आई है। दादरी अस्पताल में तीन एंबुलेंस हैं इनमें से एक गुरूग्राम तो दूसरा भिवानी ठीक होने के लिए गई हुई है। गोपी, बौंदकलां सीएचसी केंद्रों पर भी एक-एक एंबुलेंस है जो खराब पड़ी हैं। इस समय जिले के 172 गांवों की जिम्मेवारी महज एक एंबुलेंस पर ही है।
बौंदकलां क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दरकार
बौंदकलां सीएचसी में एसएमओ और एक चिकित्सक का पद खाली पड़ा है। यहां दो मेडिकल ऑफिसर ही तैनात हैं। इनके अलावा सीएचसी में स्टाफ नर्स के सात, एलएमओ का एक, फार्मासिस्ट के दो, चार फोर्थ क्लास कर्मचारियों के और रेडियोग्राफर का पद खाली पड़ा है। रानीला पीएचसी में एमओ, डेंटल, एल व फार्मासिस्ट व दो स्टाफ नर्सों के पद खाली पड़े हैं। अचीना पीएचसी में एमओ तो है लेकिन एलएमओ, स्टाफ नर्स व दो फार्थ क्लास कर्मचारियों से पद खाली हैं। इमलोटा पीएचसी में एमओ, डेंटल, स्टाफ नर्स का पद खाली है जबकि एक एलएमओ तैनात हैं। यहां सात से आठ प्रकार की दवाएं ही मरीजों के लिए उपलब्ध हैं। बौंदकलां सीएचसी के अधीन आने वाले भिवानी के गांव खरक पीएचसी में एक एलएमओ, फार्मासिस्ट व स्टाफ नर्स का पद खाली पड़ा है।
झोझूकलां क्षेत्र में दो चिकित्सकों की दरकार
झोझूकलां सीएचसी के अधीन तीन पीएचसी केंद्र आते हैं। इनमें बलकरा, संतोकपुरा व माईकलां शामिल हैं। झोझूकलां सीएचसी में चिकित्सकों के तीन पद स्वीकृत हैं लेकिन तैनाती दो पदों पर ही हैं। यहां दो एलएचवी, एक फार्मासिस्ट, एक एलटी व दो स्टाफ नर्स तैनात हैं लेकिन यहां एंबुलेंस की सुविधा नहीं है। बलकरा पीएचसी में एक चिकित्सक का पद खाली पड़ा है। माईकलां, संतोकपुरा में चिकित्सक, फार्मासिस्ट व एलटी तैनात हैं।
ग्राम पंचायत में चल रहा गोपी सीएचसी केंद्र, चिकित्सकों की कमी
गोपी का सीएचसी भवन बिल्कुल जर्जर हाल में पड़ा है। इसे तोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। इस समय सीएचसी केंद्र गांव की धर्मशाला में चल रहा है। यहां चिकित्सकों के सात पद स्वीकृत हैं और महज एक चिकित्सक की ही तैनाती है। इसके अलावा यहां 12 स्टाफ नर्सें हैं जबकि एलटी की पोस्ट खाली हैं। बाढड़ा पीएसची में एक एमओ तैनात है जबकि दो पोस्ट खाली हैं। इसके अलावा तीन स्पेशलिस्ट के पद भी यहां खाली हैं। छपार पीएचसी में एक एमओ है जबकि कादमा पीएचसी मे चिकित्सक नहीं है। हड़ौदी पीएचसी में दो चिकित्सक हैं। बाढड़ा उपमंडल में एंबुलेंस सेवा की भी कमी मरीजों को खल रही है। यहां भी अल्ट्रासाउंड या एक्स-रे सुविधा शुरू होने से मरीजों को 40 किलोमीटर दूर दादरी जिला मुख्यालय नहीं आना पड़ेगा।
वर्जन::
स्वास्थ्य सेवाओं संबंधी डिमांड हमने सरकार को भेज रखी है। चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के लिए प्रशासन प्रयासरत है। जल्द से जल्द खाली पड़े चिकित्सकों के पदों को सरकार भर देगी। - ओमप्रकाश देवराला, एसडीएम
वर्जन::
100 बेड के अस्पताल अनुसार हम यहां सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रयासरत हैं। कुछ नई मशीनें यहां आनी हैं और जल्द ही एक्स-रे मशीन की सुविधा मरीजों को दादरी सिविल अस्पताल में मिलने लगेगी। चिकित्सकों की तैनाती सरकार जल्द कर देगी इसके लिए हमने डिमांड भेज रखी है। -डॉ. रणदीप पूनिया, सीएमओ
वर्जन::
सरकार चिकित्सकों की नियुक्ति करने के लिए प्रयासरत है। प्रदेश में डॉक्टरों की कमी है। इस कारण परेशानियां आ रही हैं। जल्द से जल्द जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने की मांग सूबे के मुख्यमंत्री से करूंगा। - सुखविंद्र मांढ़ी, बाढड़ा विधायक भाजपा
वर्जन::
स्वास्थ्य सेवाओं का जिले में बुरा हाल है। मैं खुद इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री से बात कर चुका हूं लेकिन उनका रवैया टरकाने वाला है। स्वास्थ्य सेवाओं में भाजपा सरकार जिले की उपेक्षा कर रही है। सतपाल सांगवान, पूर्व मंत्री