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जिले में चार पंचायत ब्लॉकों का कामकाज संभाल रहा एक बीडीपीओ

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एक बीडीपीओ संभाल रहा चार ब्लाकों का काम
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चरखी दादरी।
जिले के चार ब्लॉकों में से तीन पंचायत ब्लॉकों में बीडीपीओ के पद खाली पड़े हैं ऐसे में नए जिले का पंचायती आधारभूत ढॉचा शुरूआत में ही चरमरा गया है। एक ब्लाक में तैनात बीडीपीओ ही चारों ब्लाकों का कामकाज संभाल रहा है। इससे गांवों के विकास के साथ बीडीपीओ कार्यालय का अन्य काम भी प्रभावित हो रहा है। इससे सरपंच आए दिन अपने कामकाज संबंधी कार्यों के लिए पंचायत कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं तीनों ब्लाकों में अधिकारी न होने पर निराश होकर लौटना पड़ता है। झोझू कलां नया ब्लॉक बना है ऐसे में यहां तो पूरे सिस्टम को नए सिरे से बनाना है ताकि कामकाज शुरू हो सके।
करीब ढाई साल बाद जिले की पंचायतों को विकास कार्यों के लिए जून माह में पैसा मिला था। जून के प्रथम सप्ताह में ही यह राशि विकास कार्यों के लिए पंचायतों के पास पहुंची थी। गांवों में इस समय विकास कार्यों की सख्त जरूरत बनी हुई है। गांवों में इस समय दूषित पानी निकासी की अधिक समस्या बनी हुई हैं। कई गांवों में पेयजल लाइन बिछाए जाने पर वहां पक्की गलियों का निर्माण करवाया जाना जरूरी है। कई गांवों की तो हालात काफी बदतर है। कई गांवों में सामुदायिक केंद्र भी बनने हैं।
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== जिले में है चार ब्लॉक
चरखी दादरी नया जिला बनने के बाद यहां चार ब्लॉक बनाए गए हैं जिनमें दादरी ब्लॉक, बाढड़ा ब्लॉक, बौंद कलां व झोझू कलां ब्लॉक शामिल हैं। झोझू कलां में दादरी व बाढड़ा ब्लॉक के कुछ गांवों को तोड़कर शामिल किया गया है। इन चारों ब्लॉकों में बीडीपीओ के पद सृजित हो चुके हैं।
== चार ब्लॉकों का काम एक बीडीपीओ संभाल रहा
पंचायत ब्लॉक का मुख्य अधिकारी बीडीपीओ ही होता है। बीडीपीओ की देखरेख व गाइडलाइन से कार्यालय व पंचायतों के सभी प्रकार के कामकाज निपटाए जाते हैं। इस समय इन जिले के तीन ब्लॉकों में बीडीपीओ तैनात नहीं हैं।
== ये काम हो रहे बाधित
पंचायत कार्यालय में रूटीन की डाक व फाइलों के निपटान का कार्य प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा रिहायशी एवं जाति प्रमाण पत्र बनवाने में परेशानी हो रही हैं क्योंकि सरपंच की ओर से हस्ताक्षरित फाइल पर प्रतिहस्ताक्षर बीडीपीओ ही करता है। इनके अलावा कार्यालय का अनुशासन एवं प्रबंधन पर भी असर पड़ता है। अधिकारी के कार्यालय में होने पर पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है।
पंचायतों के विकास कार्य हो रहे बाधित
बीडीपीओ न होने से पंचायतों के कामकाज भी बाधित हो गए हैं। समय- समय पर सरपंचों को विकास कार्यों के लिए गाइड लाइन की जरूरत पड़ती है। अधिकतर गांवों में युवा सरपंचों के पास अनुभव की भी कमी है ऐसे में उन्हें मार्गदर्शन के लिए पंचायत अधिकारियों की मदद लेनी पड़ती है। बीडीपीओ तैनात न होने से विकास कार्यों के लिए गाइड लाइन नहीं मिल पा रही है। विभिन्न प्रकार की फाइलों पर हस्ताक्षर भी पेंडिंग चले आ रहे हैं। इनके अलावा पंचायती जमीन से संबंधित मामलों का भी निपटान रूका हुआ है।
जून माह में मिला था 9 करोड़ 30 लाख का बजट
गत जून माह में करीब 100 गांवों के विकास कार्यो के लिए नौ करोड़ 30 लाख का बजट जारी हुआ था इस बजट से अधिकतर गांवों में गलियां व सामुदायिक केंद्र बनने हैं। कई गांवों में स्कूली कमरे भी बनने हैं लेकिन अधिकारियों की वजह से इन गांवों में कामकाज काफी हद तक प्रभावित हो रहे हैं।
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वर्जन==
जिले तीन ब्लॉकों में बीडीपीओ तैनात नहीं होने से कामकाज जरूर प्रभावित हो रहा है। जल्द ही सरकार की ओर से इन खाली पदों को जल्द ही भर दिया जाएगा। गांवों के विकास कार्य प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे।
पंचायत ऑफिसर ओमप्रकाश
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