झज्जर। सामान्य अस्पताल के पुराने भवन को करीब 3 माह पहले कंडम घोषित कर दिया था। उसके बावजूद भी इस कंडम भवन में ही डेंटल ओपीडी, एक्स रे, डिस्पेंसरी, स्टोर, टीबी विभाग, मलेरिया विभाग के कार्यालय चल रहे हैं। खतरे के साए में रहकर यहां पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी काम कर रहे हैं। कई बार बिल्डिंग के लेंटर के हिस्से भी टूटकर व प्लास्टर गिर चुका है। लेकिन विभाग के अधिकारी इस भवन को तोड़ने के लिए कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा रहे। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी घायल हो गया था और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इसके बाद गायनी ओपीडी यहां से बदलकर नए भवन में स्थानांतरित कर दी गई, लेकिन डेंटल ओपीडी, एक्सरे सर्विस,
डिस्पेंसरी, टीबी विभाग का कार्यालय, मलेरिया विभाग का कार्यालय इसी भवन में चल रहे हैं। जबकि दवाइयों के लिए स्टोर इस भवन में ही बनाया हुआ है।
तीन माह पूर्व हुआ था कंडम घोषित
लोक निर्माण विभाग की तरफ से इस भवन को करीब 3 माह पहले ही कंडम घोषित किया जा चुका है। लेकिन लोक निर्माण विभाग की तरफ से इस भवन को तोड़ने की कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लोक निर्माण विभाग को कई बार पत्र लिखे जाने के बावजूद भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया है। सामान्य अस्पताल के अधिकारियों का कहना है लोक निर्माण विभाग की तरफ से इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
हो सकता है बड़ा हादसा
सामान्य अस्पताल के पुराने भवन की पोर्च के पिल्लर पूरी तरह से गल चुके हैं। यहां से ही मरीज और कर्मचारी इस भवन में प्रवेश करते हैं। करीब 70 से 80 मरीज दंत ओपीडी में, करीब 100 मरीज एक्सरे के लिए, करीब 800 से 1000 मरीज डिस्पेंसरी में दवाई लेने के लिए आते हैं। भवन कंडम होने के कारण किसी भी समय कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद भी अस्पताल प्रशासन और लोक निर्माण विभाग इसे लेकर गंभीर नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की कार्य प्रणाली पर भी सवालिया निशान लगते हैं कि जब भवन को कंडम घोषित किया जा चुका है तो इसे खाली क्यों नही किया जा रहा है।
सामान्य अस्पताल के पुराने भवन कंडम घोषित करने के बावजूद लोक निर्माण विभाग की तरफ से इसे तोड़ने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। बार-बार पत्र व्यवहार भी किया जा चुका है।
- डॉ संजय सचदेवा, एसएमओ, झज्जर।
सामान्य अस्पताल के पुराने भवन तोड़ने से पहले इस पर होने वाले खर्च का एस्टीमेट बनेगा। उसके बाद ही भवन तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। तीन चार दिन में इस भवन का एस्टीमेट तैयार कर दिया जाएगा।
- विरेंद्र मलिक, कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग, झज्जर।