अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। बिजली किल्लत झेल रहे 20 गांवों के ग्रामीणों का सब्र सोमवार सुबह जवाब दे गया। ग्रामीण झोझूकलां सब-स्टेशन पहुंचे और बिजली सप्लाई काटकर कर्मचारियों को कार्यालय से बाहर निकाल दिया। इसके बाद ग्रामीण सब-स्टेशन का गेट बंद करके धरने पर बैठ गए। इसके बाद पहले तहसीलदार और फिर बिजली निगम के एक्सईएन ग्रामीणों को मनाने पहुंचे। लेकिन देर शाम तक चली वार्ता सिरे नहीं चढ़ पाई। वहीं, इससे पहले सदर थाना पुलिस भी ग्रामीणों का धरना खत्म कराने में कामयाब नहीं हो पाई। ग्रामीणों द्वारा सब-स्टेशन की बागड़ोर अपने हाथों में लेने और बिजली सप्लाई काटने से इससे जुड़े करीब दो दर्जन गांवों में बिजली सप्लाई नहीं हो पाई। देर शाम ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना और मंगलवार से क्रमबद्ध आमरण अनशन पर बैठने का एलान भी कर दिया। समाचार लिखे जाने तक ग्रामीण बिजली सप्लाई बंद कर धरने पर बैठे रहे।
झोझूकलां, झोझू खुर्द, गुडाना, बादल, असावरी, जावा, बीजणा, चंदेनी, पिचौपा, निहालगढ़ सहित करीब 20 गांवों के ग्रामीण सोमवार सुबह नौ बजे झोझूकलां सब-स्टेशन पहुंचे। करीब 300 की तादाद में पहुंचे ग्रामीणों ने कर्मचारियों को बाहर निकालने और सब स्टेशन की सप्लाई बाधित करने का निर्णय लिया और सब-स्टेशन के अंदर प्रवेश कर गए। इसके बाद ग्रामीणों ने कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया और कन्नी प्रधान सूरजभान की अध्यक्षता में धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों के सब-स्टेशन की बागड़ोर अपने हाथों में लेने की सूचना मिलते ही सदर थाना प्रभारी जगराम अपनी टीम सहित पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को मनाने का प्रयास किया। लेकिन ग्रामीण मौके पर निगम उच्चाधिकारियों को बुलाने की मांग पर अड़ गए। शाम करीब चार बजे पहले तहसीलदार और पांच बजे एक्सईएन बिजली निगम मौके पर पहुंचे। उनके सामने ग्रामीणों ने अपनी मांगें रखी। करीब एक घंटे की वार्ता के बाद ग्रामीणों को सभी मांगों पर एक्सईएन आश्वस्त नहीं कर पाए। इसके बाद ग्रामीणों ने धरना अनिश्चितकाल तक धरना जारी रखने का एलान कर दिया।
तहसीलदार की एक न सुनी, भेजा वापस
कन्नी प्रधान सूरजभान ने बताया कि शाम करीब चार बजे तहसीलदार मौके पर आए थे। लेकिन ये पैमाइश या गिरदवारी का मसला नहीं था इसलिए ग्रामीणों ने उन्हें बिना बात किए ही वापस जाने को कहा। इसके बाद तहसीलदार वापस चले गए। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की मांग है कि मौके पर निगम के एसई ही आएं। क्योंकि एक्सईएन उनकी मांगों को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बता रहे हैं।
ये हैं 20 गांवों के ग्रामीणों की मांगें
- जो हब ट्रांसफार्मर जला था, उसी क्षमता का ट्रांसफार्मर मंगवाया जाए। फिलहाल जो नया ट्रांसफार्मर है वो छोटा है।
- सब-स्टेशन से जुड़े सभी गांवों को दिन में 18 से 20 घंटे प्रतिदिन बिजली सप्लाई दी जाए।
- क्रशर जोन को सब-स्टेशन हटाया जाए और क्रशर जोन के लिए 33 केवी का सब-स्टेशन अलग से बनाया जाए।
- लोहे के जर्जर पोल और गांवों में कंडम व लटकती तारों को निगम तुरंत प्रभाव से दुरुस्त कराए।
- सब-स्टेशन से संबंधित गांवों की करीब 40 प्रतिशत आबादी खेतों में बसी है इसलिए वहां रहने वाले सभी लोगों को सिंगल फेस कनेक्शन मुहैया कराएं।
वर्जन
ग्रामीणों को मैंने कुछ मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था। लेकिन ग्रामीण नहीं माने। जगमग योजना में जुड़ने वाले गांवों को पूरी बिजली सप्लाई दी जा रही है। ग्रामीण जगमग योजना से गांवों को जोड़ने में निगम का सहयोग करें। बिजली वितरण निगम जगमग योजना के तहत आने वाले गांवों में अधिक आपूर्ति देने के लिए वचनबद्ध है। इसके लिए झोझू और आसपास के गांवों में भी कैंप लगाकर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।
- ओमबीर सिंह, कार्यकारी अभियंता, बिजली निगम।
वर्जन
मंगलवार से कुछ ग्रामीण आमरण अनशन भी शुरू करेंगे। मांगें पूरी होने के बाद ही धरना खत्म होगा। एक्सईएन ने मांगों को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बता दिया। इसलिए एसई मौके पर आएं और इन्हें पूरा करने का आश्वासन दें। हम सब स्टेशन की बिजली सप्लाई सुचारु कर धरने से उठ जाएंगे।
- सूरजभान, कन्नी प्रधान।