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अब कौन बांधेगा तीन भाईयों की कलाई पर राखी...

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
आखिर उन तीन भाईयों की कलाई पर अब राखी कौन बांधेगा...। यह सवाल उनके मन में रह-रहकर उठ रहा होगा। दरअसल, वीरवार की सुबह बहादुरगढ़ के प्लेटफार्म नंबर-2 पर मौत का शिकार हुई रोशनी तीन भाईयों में सबसे छोटी और इकलौती थी। मां-बाप की आंखों के आंसू भी रोशनी की मौत के बाद नहीं रुक रहे हैं।
वीरवार को रोशनी की मां शालू अपने छोटे बेटे कृष्णा को पेट दर्द की दवाई दिलाने के लिए बहादुरगढ़ के प्लेटफार्म पर सुबह करीब पौने आठ बजे पहुंची थी। वह लाइनपार के बराही फाटक के नजदीक किराये के मकान में रहती है। उसके पति मुकेश फरीदाबाद के पास बल्लभगढ़ में स्थित एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत है। रोशनी अपने भाईयों में सबसे छोटी थी।
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भाईयों में सबसे बड़ा राहुल (12), रोहन (10) व कृष्णा (5) है। रोशनी नर्सरी कक्षा में पढ़ती थी। मुकेश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के कुंवरपुरा गांव का रहने वाला है, लेकिन अपने पूरे परिवार समेत फिलहाल 15 साल से बहादुरगढ़ में किराये के मकान में रहता है। मुकेश का कहना है कि तीन भाईयों में सबसे छोटी रोशनी थी जिससे उसका घर पूरा रोशन रहता था। अब उसकी मौत के बाद पूरा परिवार सदमे में है। उसकी मां, भाईयों व अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल में जब वह घटना की सूचना मिलने के बाद पहुंचे तो उनकी आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे। परिवार के अन्य सदस्य भी अस्पताल पहुंच गए थे। सभी की जुबां से केवल एक ही बात निकल रही थी कि अब तीन भाईयों की कलाई पर राखी कौन बांधेगा।
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