अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
आईपीएस अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेंद्र सिंह ने कहा कि महिलाओं को अपने परिजनों से तालमेल के साथ रहना चाहिए। उनकी व उनके परिवार की तरक्की इसी से संभव है। आत्म सम्मान की रक्षा के लिए बौखलाना ठीक नहीं। वह अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा कानून में महिला अधिकार विषय पर वैश्य आर्य बीएड महिला कालेज बहादुरगढ़ में आयोजित सेमिनार में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
अमर उजाला फाउंडेशन ने बहादुरगढ़ शिक्षा सभा के सहयोग से वैश्य आर्य बीएड महिला कॉलेज में सेमिनार का आयोजन किया। सेमिनार का उद्देश्य महिलाओं खासतौर पर कॉलेज छात्राओं में जागरूकता पैदा करना था। एएसपी लोकेंद्र सिंह के अलावा एसडीएम जगनिवास और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश छिकारा ने भी छात्राओं व अध्यापिकाओं को संबोधित किया। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा ने बहुत धारा प्रवाह ढंग से अपने ओजस्वी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के अंत में अमर उजाला की ओर से अतिथियों/वक्ताओं को स्मृति चिह्न भेंट किए गए। अमर उजाला के विक्रय एजेंट अंकुर व चिराग चुघ भी इस मौके पर मौजूद रहे।
सामंजस्य की दी सलाह
एएसपी लोकेंद्र सिंह ने छात्राओं को क्लेशरहित और खुशहाल जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। कानून व पुलिस की उपयोगिता बताने के साथ-साथ उन्होंने परिवार में मिलजुल कर प्रेमपूर्वक रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पति व ससुराल पक्ष को लोगों के साथ सामंजस्य बैठाने की कोशिश करना बेहद जरूरी होता है। असहनशीलता बहुत बार नुकसानदायक साबित होती है। अपने सम्मान की रक्षा के लिए कोशिश तो करनी चाहिए, लेकिन बौखलाहट ठीक नहीं। इसके बावजूद कोई दिक्कत आती है तो नारी की रक्षा के लिए कानून और पुलिस कभी दूर नहीं हैं। संकट में डरें नहीं, समझदारी से काम लें।
महिलाओं का सर्वाधिक त्याग
एसडीएम जगनिवास ने परिवार, समाज व राष्ट्र के निर्माण में नारी के योगदान की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि परिवार की उन्नति के लिए जितना त्याग घर की महिलाएं कर सकती हैं, उतना पुरुष नहीं कर पाते। गांव की महिलाओं को तो सुबह 4 बजे उठकर देर रात तक परिश्रम करते देखा जा सकता है। उन्होंने महिला रक्षा व महिला उत्थान के लिए सरकार के प्रयासों का जिक्र भी किया। परिवार को अनुशासन में रखने के लिए महिलाओं की बहुत बड़ी भूमिका होती है। मां अगर ध्यान न दे तो बच्चे के गलत रास्ते पर भटकने की आशंका रहती है।
कानून के प्रावधान बताए
बार एसोसिएशन बहादुरगढ़ के प्रधान वरिष्ठ वकील सतीश छिकारा ने सेमिनार में महिलाओं के लिए उपयोगी कई कानूनों पर प्रकाश डाला। पराए पुरुष द्वारा बुरी नीयत से देखने, छेड़छाड़, दुष्कर्म, दहेज प्रताड़ना के मामलों पर भारतीय दंड संहिता में प्रावधानों की जानकारी दी। ससुराल की संपत्ति में अधिकार पर भी उन्होंने चर्चा की। एडवोकेट छिकारा ने बताया कि कानूनी सहायता प्राधिकरण और दूसरी संस्थाएं महिलाओं को नि:शुल्क कानूनी मदद भी उपलब्ध कराती हैं। आवश्यकता पड़ने पर महिलाएं चाहें तो इसके लिए बार एसोसिएशन जैसी संस्था से भी संपर्क कर सकती हैं।