बहादुरगढ़। सात मई को अक्षय तृतीया है। सनातन धर्म में वैशाख शुक्ल पक्ष को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। तृतीया तिथि 6-7 मई की अलसुबह 3:22 बजे लग रही है जो 7-8 मई की अलसुबह 2:20 बजे तक रहेगी। इस बार यह तिथि बेहद शुभ संयोग संजोए हुए है। स्थिर योग इसे खास बना रहा है। दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी आचार्य मनोज मिश्र ने बताया कि अक्षय तृतीया व स्थिर योग के संयोग से तिथि विशेष में व्रत-पर्व-दान और भी पुण्य फलदायी होगा। मान्यता है कि इस तिथि में दान, स्नान, जप आदि कर्मों का फल अक्षय होता है। अक्षय पुण्य की दृष्टि से ही इस तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। इस दिन स्वर्ण खरीदने पर वह भी अक्षय हो जाता है। स्वर्ण खरीदारी का शुभ समय दोपहर 12:20 बजे से 2:24 बजे तक है। वैसे इस दिन कभी भी खरीदारी की जा सकती है। आचार्य मिश्र के मुताबिक माह भर तिथियों का घटना-बढ़ना लगा रहता है जबकि, अक्षय तृतीया पर सूर्य व चंद्र दोनों एक ही राशि में अपने चरम बिंदु पर होते हैं। इस दिन किए गए शुभ कार्य, खरीदारी, दान व पूजा का महत्व बढ़ जाता है। अक्षय तृतीया पर इस बार 16 वर्ष बाद सूर्य, शुक्र, राहु व चंद्र उच्च राशि वृष में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही इसी दिन भगवान परशुराम का अवतार दिवस तथा त्रेता युग की शुरुआत का संयोग भी बन रहा है। ऐसा संयोग वर्ष 2003 में बना था।
आभूषण खरीदने का है विधान
अक्षय तृतीया के दिन सोना अथवा चांदी के आभूषण खरीदने का विधान है। कई लोग घर में बरकत के लिए इस दिन सोने या चांदी की लक्ष्मी की चरण पादुका लाकर घर में रखते और उसकी नियमित पूजा करते हैं। साथ ही इस दिन पितरों की प्रसन्नता और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए किसी ब्राह्मण को जल कलश, पंखा, खड़ाऊं, छाता, सत्तू, ककड़ी, खरबूजा, फल, शक्कर, घी आदि दान करने चाहिए। चूंकि कन्या दान सभी दानों में महत्वपूर्ण बताया गया है, इसलिए इस दिन लोग शादी-विवाह का विशेष आयोजन करते हैं।
होती है अक्षय समृद्धि
आचार्य मिश्र ने बताया कि अक्षय तृतीया खरीदारी के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त है। इस दिन सोना, चांदी, वस्त्र और बर्तन खरीदने का विशेष महत्व है। इस बार रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि का चंद्रमा मुहूर्त को और विशेषता प्रदान कर रहा है। इस दिन दान का भी बहुत महत्व है इसलिए कई लोग कन्यादान के लिए भी अक्षय तृतीया का दिन चुनते हैं। दान के लिए भी इस दिन खरीदारी करना श्रेष्ठ माना गया है। अखंड समृद्धि मिलती है।
भाग्य वृद्धि का सूचक
अक्षय तृतीया को अक्षय तीज नाम से भी जाना जाता है। इसे भगवान विष्णु का दिन माना गया है। ग्रंथ एवं पुराणों के अनुसार त्रेता युग का आरंभ अक्षय तृतीया के दिन से ही हुआ था। अक्षय तृतीया को भाग्य में वृद्धि का सूचक भी माना गया है। इसलिए इस दिन लोग सोना, स्वर्ण आभूषण और स्वर्ण मुद्राएं खरीदते हैं, ताकि उनकी समृद्धि आने वाले सालों में भी बनी रहे।