चरखी दादरी। रोडवेज हड़ताल के तीसरे दिन तो चरखी दादरी डिपो में महज सात चालक ही ड्यूटी पर पहुंचने से व्यवस्थाएं पूरी तरह गड़बड़ाई रही। सुबह की शिफ्ट में दो बसें निकालने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था करके तीसरी बस जब स्टैंड से बाहर निकली तो बिफरे हड़ताली कर्मियों ने इसे रुकवा लिया। चंद मिनट बाद चौथी बस बाहर निकली तो उसे भी यूं ही रुकवा दिया गया। इन बसों को दमकल विभाग के कर्मचारी चला रहे थे। इससे खफा होकर रोडवेज कर्मचारी वहीं सड़क पर बैठ गए और करीब पांच मिनट तक ट्रैफिक व्यवस्था बाधित रही। इसके बाद प्रदर्शन कर रोज गार्डन पहुंचे और वहां सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वीरवार को डिपो परिसर में 90 प्रतिशत बसें खड़ी रहीं और इसके चलते करीब 40 हजार से अधिक यात्रियों को परेशानियां झेलनी पड़ी। जिन बसों को डिपो से चलाया गया उनमें परिचालक नहीं होने से यात्रियों ने निशुल्क यात्रा की। रोडवेज कर्मियों के समर्थन में अब अन्य विभागों के कर्मचारी भी उतरने लगे हैं इससे सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। वीरवार को बिजली निगम कर्मियों सहित शिक्षा विभाग कर्मियों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी रोज गार्डन में अपना समर्थन देने पहुंचे। वहीं, बिजली निगम कर्मियों ने तो दो घंटे रोष प्रदर्शन किया जिससे कुछ देर के लिए कार्यालय की सेवाएं बाधित रहीं।
चरखी दादरी बस स्टैंड परिसर से वीरवार सुबह दो बसें रवाना हुई। इसके बाद दोपहर एक बजे तक बसों के आवागमन पर ब्रेक लगा रहा। वीरवार को बस स्टैंड परिसर पर पांच डिपो के और एक-एक भिवानी व रोहतक डिपो के चालक ही मौजूद होने से बसें चलाना मुश्किल हो गया। जिला प्रशासन के निर्देशों पर रोडवेज जीएम के पास दमकल विभाग के 14 कर्मचारी, पांच पुलिस एमटीओ और एक पशु पालन विभाग का चालक बस चलाने के लिए पहुंचे। दोपहर करीब सवा एक बजे जब दो बसें डिपो परिसर से बाहर निकलीं तो एक को बस स्टैंड के सामने और दूसरी को पीएनबी के समीप हड़ताली कर्मचारियों ने रुकवा लिया। इस दौरान बस स्टैंड के सामने रोडवेज कर्मचारी सड़क पर बैठ गए। इससे जाम लग गया। पांच मिनट बाद ही कर्मचारी खुद उठकर नारेबाजी कर रोज गार्डन की तरफ चल पड़े। यहां कर्मचारी नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाए। वहीं, पहले दो दिन की हड़ताल में डिपो के करीब 70 प्रतिशत कर्मचारी ही शामिल थे और इससे 30 से 40 फीसदी बसों का संचालन हो रहा था। वीरवार को हड़ताली कर्मियों का आंकड़ा बढ़कर 95 प्रतिशत जा पहुंचा। बढ़ी तादाद में कर्मचारी हड़ताल में शामिल होने से दोपहर सवा एक बजे तक सात बसें ही डिपो परिसर से रवाना हो पाई। विभाग ने जब वैकल्पिक व्यवस्था के लिए दूसरे विभागों के चालकों को बुलाकर रोडवेज का स्टेयरिंग तो थमा दिया लेकिन परिचालक न होने बसे दो बसों में निशुल्क यात्रा कराई गई। वहीं, हड़ताल के चलते बसों के पहिये जाम रहने से करीब 40 हजार से अधिक यात्रियों को परेशानियां झेलनी पड़ीं।
नौ कर्मचारी जा चुके जेल, पांच हुए टर्मिनेट
हड़ताल के पहले दिन ही बसों के संचालन में व्यवधान करने पर रोडवेज अधिकारियों ने कर्मचारियों पर मामला दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस ने नौ कर्मचारियों को गिरफ्तार कर उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया। वहीं, बुधवार देर शाम दो और चालकों को ड्यूटी पर नहीं आने और हड़ताल में शामिल होने के चलते टर्मिनेट कर दिया गया है। डिपो से टर्मिनेट किए गए कर्मचारियों की संख्या अब पांच हो गई है। रोज गार्डन में कर्मचारियों को संबोधित कर वक्ताओं ने कहा कि सरकार के खिलाफ अब आंदोलन और तेज किया जाएगा। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा संगठनों और खापों से बातचीत की जा रही है। नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि कुछ खापों के पदाधिकारी समर्थन देने के लिए तैयार हैं और मौखिक तौर पर उनसे बातचीत हो चुकी हैं। शुक्रवार को रोज गार्डन में इस संबंध में बैठक आयोजित की जाएगी।
डीएसपी के निरीक्षण में नदारद मिले पुलिसकर्मी, इंचार्ज को फटकार
वीरवार दोपहर एक से डेढ़ बजे तक रोडवेज कर्मियों के प्रदर्शन करने और इसके बाद वापिस पार्क में आने पर डीएसपी दिलीप कुमार भी रोज गार्डन पहुंच गए। इस दौरान उन्होंने वहां तैनात पुलिस कर्मियों को लाइन अप किया तो दो पुलिस कर्मी ड्यूटी से नदारद मिले। इस पर उन्होंने इंचार्ज सुरेंद्र सिंह को फटकार लगाई। इसके अलावा उन्होंने उक्त दो पुलिस कर्मियों को ब्योरा भी तलब कर लिया है।
कोट
जिन हड़ताली कर्मचारियों ने बसें रुकवाई हैं उनके खिलाफ पुलिस को शिकायत दी जाएगी। वीरवार को काफी तादाद में कर्मचारी हड़ताल में शामिल होने से चालक-परिचालकों की कमी बन गई और इससे बसों के संचालन में दिक्कतें आईं। - धनराज कुंडू, जीएम, रोडवेज