अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
सोमवार को बंसत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा उत्सव है। इसलिए कारीगर प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे चुके हैं। इन कारीगरों की बनाई प्रतिमाएं पूजन के लिए तैयार हैं। सिटी पार्क मेट्रो स्टेशन के पास सड़क किनारे बनी झुग्गियों के पास पूजा उत्सव से पहले दिन भी कई श्रद्धालुओं ने प्रतिमाएं खरीदीं। लेकिन अपने लिए दो समय की रोटी और दूसरों की खुशी के लिए ये प्रतिमाएं बनाने वाले 10 परिवार फिलहाल संकट में हैं। इनके सिर के ऊपर से झुग्गियों का साया कुछ ही दिन में छिन जाएगा। यहां से झुग्गियां हटीं तो इनका रोजी-रोटी का जरिया भी खत्म हो जाएगा।
आगामी मार्च या अप्रैल में मुंडका-बहादुरगढ़ रूट पर मेट्रो रेल सेवा शुरू होने की संभावना है। माना जा रहा है कि मेट्रो बहादुरगढ़ में विकास की बयार लेकर आ रही है। लेकिन सिटी पार्क मेट्रो स्टेशन के पास जलापूर्ति विभाग के ऑफिस के साथ सड़क किनारे झुग्गियों में बसे परिवारों के लिए मेट्रो रेल विनाश की बयार लेकर आएगी।
दूसरों को देते हैं खुशियां
राजस्थान के जोधपुर जिला मूल के अमर सिंह ने बताया कि वह परिवार के साथ 1987 में रोजगार के लिए बहादुरगढ़ आए थे। यहां इस परिवार ने गुजारे के लिए मेहनत मजदूरी करना शुरू किया। कुछ समय बाद बच्चों के खिलौने और गुब्बारे आदि बेचने शुरू कर दिए। परिवार भी बढ़ता गया। पांच बेटी और पांच बेटे हो गए। दाल-रोटी चलाने के लिए रोजगार के लिए एकाध काम और जोड़ लिया। बहादुरगढ़ में महाराष्ट्र और पूर्वांचल के भी बहुत लोग रहते हैं। इसलिए गणपति व सरस्वती की प्रतिमाएं बनानी शुरू कर दी। अमर सिंह ने बताया कि इन दिनों भी उसका परिवार सरस्वती प्रतिमाएं बना रहा है।
49 लोग रहते हैं यहां
अमर सिंह के पांच बेटे और पांच बेटियां हैं। जिनमें बेटे हजारी, गणपत, गोपी, रोशन व सरूपा और बेटियां बिमला, सरूपी, कमला, लक्ष्मी व सरोज हैं। एक बेटा व एक बेटी अविवाहित हैं। चार विवाहित बेटों के 15 बच्चे और चार विवाहित बेटियों के 22 बच्चे हैं। कुल मिलाकर यहां 9 झुग्गियों में छोटे बड़े 49 लोग रहते हैं। एक झुग्गी में भैरों मंदिर बना रखा है। इनमें से 15 बड़े सदस्य प्रतिमाएं बनाने और खिलौने आदि बेचने का कार्य करते हैं। ये एक से सात फुट तक की ऊंचाई वाली प्रतिमाएं बनाते हैं। सभी प्रतिमाएं ढलाई से तैयार की जाती हैं। इनकी कीमत 300 से पांच हजार रुपये तक है।
गुजारा करने के लिए आए थे, रहम करो सरकार
हम 30 साल से यहां रहते हैं। मेरे दादा व नानी भी यहीं रहते हुए भगवान को प्यारे हो गए। गरीबी इतनी है कि छोटा-सा घर भी नहीं बना पाए। अब मेट्रो वाले कहते हैं कि हमारी झुग्गियों को जल्द हटा देंगे। ये झुग्गियां ही हमारे घर और दुकान है। ये ही उजड़ गई तो हमारे लिए बच्चों को रोटी खिलाना मुश्किल हो जाएगा। नेता वोट तो ले लेते हैं, लेकिन भला किसी ने कुछ नहीं किया। सरकार को हमारे पर रहम करना चाहिए।
- गोपीराम, अमर सिंह का बेटा।
सौंदर्य के लिए किसी को नहीं करें बेघर
शहर के विकास व सौंदर्यकरण के लिए किसी को बेघर करना मानवता नहीं है। विकास तो हो, लेकिन हर किसी को छत मुहैया कराना भी शासन का फर्ज होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सभी को घर देना चाहते हैं। अगर इन झुग्गियों को यहां से हटाना बहुत जरूरी है तो प्रशासन को इन परिवारों के लिए रहने व रोजगार चलाने के लिए किसी दूसरे ठिकाने पर जगह मुहैया करानी चाहिए।
- सतपाल हाडा, सोशल एक्टिविस्ट।