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कागजों में ही निपटाई जाती है शिकायत, नहीं होती कोई कार्रवाई

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अमर उजाला ब्यूरो
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झज्जर।
आमजन की शिकायत को निपटाने के लिए प्रदेश सरकार के द्वारा बनाई गई सीएम विंडो पर आने वाली शिकायतों को जिला प्रशासन के अधिकारी गंभीरता से नहीं लेते। जिसका नतीजा ये है कि आमजन को सीएम विंडो से फायदे की बजाए नुकसान ही हो रहा है। लोग सीएम विंडो के चक्कर में अपना समस्या बर्बाद करते हैं और उन्हें कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं मिलता। सीएम विंडो में दर्ज शिकायतों को अधिकारी अपने स्तर पर ही निपटा देते हैं। कई मामलों में देखने का आया है कि जिस अधिकारी के खिलाफ आमजन शिकायत करते हैं, उसी को मामले की जांच सौंप दी जाती है। ऐसे में सीएम विंडो पर होने वाली शिकायतों से न्याय मिलेगा इसकी उम्मीद कैसे की जा सकती है।
फिरनी पर कब्जे की थी शिकायत, बिना बताए निपटा दी
गुरुकुल झज्जर के कृष्ण कुमार ने एक सिंतबर 2017 को सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में कृष्ण कुमार ने नया गांव की फिरनी पर हुए अवैध कब्जे को हटवाने की मांग की थी। कृष्ण ने बताया था कि 22 फुट चौड़ी फिरनी पर किसी ने छह जगह पर चबूतरा बनाकर कब्जा कर रखा है। जिस पर गिरदावर ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मौके पर ऐसा कोई कब्जा नहीं किया गया। इसके बाद उसके सूचित भी नहीं किया गया। इसको लेकर उसने 20 दिसंबर को इस बारे में डीसी को शिकायत दी। जिस पर भी कोई जांच नहीं लिया गया तो सीएम को सीधा पत्र लिखा है।
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आंकड़ों में इतनी शिकायतों का समाधान
सीएम विंडो नोडल अधिकारी सीटीएम कार्यालय के रिकार्ड के अनुसार जिले में अभी तक 4962 शिकायत दर्ज हुई हैं, जिसमें से अधिकारियों द्वारा 4443 शिकायतों का निवारण किया जा चुका है। आंकड़ों के अनुसार केवल 519 शिकायतें ही पेंडिंग हैं। लेकिन हकीकत तो ये है कि अधिकारियों के द्वारा शिकायतों की संख्या को कम करने के लिए जांच को सही तरीके से नहीं किया जाता।
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वर्जन
लोगों की शिकायत मिलने पर उसके समाधान के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाते हैं। शिकायत पर कार्य पूरा होने के उपरांत शिकायतकर्ता को सूचित किया जाता है। कई बार शिकायतकर्ता उस पर हस्ताक्षर नहीं करता तो विशिष्ठ नागरिक के हस्ताक्षर करवाते हुए शिकायत को पोर्टल से हटा दिया जाता है। उनके अनुसार किसी भी शिकायतकर्ता के साथ अन्याय नहीं हो सकता।
- अश्विनी कुमार, नोडल अधिकारी, सीएम विंडो।
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