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डीसी साहब स्वच्छता सर्वे में पिछड़ जाएगा शहर, 6 माह बाद भी वर्किंग में नहीं आए मोबाइल टॉयलेट

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अमर उजाला ब्यूरो
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झज्जर।
नगरपालिका द्वारा 6 माह पूर्व एक कंपनी से खरीदे गए मोबाइल टॉयलेट अभी तक वर्किंग में नहीं आए हैं। इसके चलते तय लग रहा है कि शहर स्वच्छता सर्वे में पिछड़ जाएगा। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि 4 जनवरी से स्वच्छता शुरू होना है लेकिन नपा के द्वारा मोबाइल टॉयलेट के मेंटेनेंस के लिए टेंडर नहीं छोड़ा गया है। इसके चलते ये टॉयलेट सफेद हाथी बनकर रह गए हैं। टॉयलेट के लिए नपा द्वारा न तो पानी का कनेक्शन किया गया है और ना ही निकासी के लिए सीवरेज कनेक्शन जोड़े गए हैं। ऐसे में ओडीएफ के साथ-साथ शहर की स्वच्छता को भी पलीता लगा रहा है। इसके चलते रैंकिंग में शहर को खराब परिणाम के लिए तैयार रहना चाहिए।
22 लाख में खरीदे थे टॉयलेट
शहर में नपा के द्वारा रखवाए गए टॉयलेट 22 लाख रुपये की लागत से खरीदे गए थे। नपा ने शहर को ओडीएफ बनाने के लिए अलग-अलग स्थानों पर 12 मोबाइल टॉयलेट रखवाए थे जिनमें से दो को नपा कार्यालय में वापस खड़ा कर दिया गया। वहीं एक मोबाइल टॉयलेट के टायर चोरी हो गए। इसके बाद नपा टीम ने खुद ही मोबाइल टॉयलेट के टायर उतार लिए थे और उन्हें ईंटों के सहारे खड़ा कर दिया था।
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मेंटेनेंस वर्क का लगना है टेंडर
टॉयलेट को लेकर मेंटेनेंस वर्क का टेंडर जारी किया जाना है। क्योंकि देख-रेख व दूसरे कार्यों के लिए नपा के पास कर्मचारियों का टोटा है। ऐसे में नपा के द्वारा मेंटेनेंस वर्क को लेकर टेंडर लगाया जाना है जिसमें नपा के द्वारा की जा रही देरी शहर की स्वच्छता को बिगाड़ रही है। अगर स्वच्छता के हालात बिगड़े तो स्वच्छता सर्वे में भी शहर की रैकिंग गड़बड़ा जाएगी।
नहीं उठा रहा कोई मुद्दा
शहर की सरकार के द्वारा राजनीति के लिए काफी बार अनेक मुद्दों पर लड़ाई लड़ी जाती है लेकिन इस मामले को लेकर किसी भी पार्षद ने अधिकारियों से सवाल करना उचित नहीं समझा है। इससे लग रहा है कि उन्हें आमजन के हितों से कोई सरोकार नहीं है। नपा कार्यालय अमूमन आए दिन राजनीतिक का अखाड़ा बनता है लेकिन देखने में यही आता है कि लड़ाई हर बार निजी हितों को लेकर ही होती है।
मीटिंग में उठाएंगे मुद्दा
नपा हाउस की बैठक में मामला उठाया जाएगा। बैठक में अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा कि आखिरकार वे क्यों शहर के सौंदर्यीकरण को लेकर इतने उदासीन हैं। अगर शहर स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ता है तो इसकी जिम्मेदारी सिर्फ अधिकारियों की होगी क्योंकि वे मोबाइल टॉयलेट की समस्या को सुलझाने के लिए सार्थक प्रयास नहीं करते हुए नजर आ रहे।
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डीसी से करेंगे मुलाकात: सैनी
मेंटेनेंस वर्क का टेंडर लगाने के लिए डीसी की अप्रूवल ली जानी है। इसके लिए डीसी से मुलाकात की जाएगी व पूरे मामले के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। अप्रूवल मिलते ही टेंडर लगा दिया जाएगा।
नरेंद्र सैनी, सचिव, नपा झज्जर।
छह माह पहले खरीदे 22 लाख के टॉयलेट एक दिन भी नहीं हुए यूज
-मेंटेनेंस टेंडर नहीं छोड़े जाने के चलते अधर में लटका प्रोजेक्ट
डीसी साहब ! स्वच्छता सर्वे में पिछड़ जाएगा शहर, 6 माह बाद भी वर्किंग में नहीं आए मोबाइल टॉयलेट
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