अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
क्षेत्र से गुजर रही दुल्हेड़ा माइनर बुधवार की घनी सुबह गांव रोहद के पास टूट गई। इससे यहां की सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गई। ज्यादातर भूमि पर धान की कटी व खड़ी फसल है, जो पानी में डूब गई है। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में दो से ढाई फीट पानी भरने से रबी फसलों की बिजाई पर भी संकट के बादल मंडरा गए हैं। सूचना मिलने पर सिंचाई विभाग का दस्ता मौके पर तो पहुंचा, लेकिन टूटी माइनर को ठीक करने का कार्य जल्द शुरू नहीं हो पाया। प्रभावित किसानों ने सरकार से मुआवजा देने की मांग की है। किसानों ने कहा कि माइनर की पटरी कमजोर थी। जैसे ही पानी आया तो यह दबाव झेल नहीं पाई और खरहर की तरफ करीब 30 फीट के हिस्से में ढह गई। इससे खेतों की तरफ पानी का तेज बहाव हुआ और कुछ ही घंटों के अंदर 200 एकड़ से अधिक भूमि जलमग्न हो गई।
मानइर में मंगलवार को आया था पानी
किसानों की मानें तो माइनर कुछ दिन से बंद थी। इसमें मंगलवार की शाम को ही पानी आया था और बुधवार अलसुबह यह टूट गई। सुबह जब किसान खेतों की तरफ गए, तब सब कुछ जलमग्न था। उसके बाद तो भारी संख्या में किसान गांव से खेतों की तरफ दौड़ पड़े। माइनर के टूटे हिस्से के पास पहुंचे। प्रशासन और सिंचाई विभाग को सूचना दी गई, लेकिन पानी का बहाव तेज होने के कारण माइनर के टूटे हिस्से को ठीक करने का कार्य जल्द नहीं हो पाया।
फसल डूबने से लाखों का नुकसान
माइनर के पानी से रोहद गांव की जितनी भूमि जलमग्न हुई है, उसमें से 95 फीसदी भूमि पर धान की कटी और खड़ी फसल हैं। कटी हुई फसलों को ज्यादा नुकसान पहुंचा है। खड़ी फसलों में भी नुकसान हुआ है। इनकी कटाई अब जल्द नहीं हो पाएगी। इससे किसान परेशान हैं। उनके खून-पसीने की कमाई पानी में चली गई है। गांव के किसान प्रदीप, ब्रह्म सिंह नंबरदार, होशियार सिंह, प्रेम, जितेंद्र, रोहतास, जयकरण समेत अन्य प्रभावित किसानों ने इसके लिए सिंचाई विभाग और सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि माइनर की पटरी पहले से कमजोर थी। इसका विभाग को भी इल्म था। मगर इसको दुरुस्त नहीं किया गया। इसी कारण इसके टूटने की नौबत आई, मगर अब जो नुकसान हुआ है। उसकी क्षतिपूर्ति तो प्रशासन व सरकार को ही करनी चाहिए।
पटरी पाटने का काम शुरू हुआ तो जेसीबी खराब हुई
माइनर के टूटे हिस्से को ठीक करने का काम बुधवार की शाम को शुरू हो पाया। इससे पहले पानी का बहाव रोहतक से बंद कराया गया। फिर गांव के हिस्से में ही एस्केप खोलकर माइनर से पानी निकाला गया। मगर जैसे ही माइनर को ठीक करने का काम शुरू हुआ, उसमें जेसीबी भी खराब हो गई।